नई दिल्ली - देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक के मामलों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार का बहुप्रतीक्षित 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' अब संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया है। लोकसभा से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी विपक्ष के वॉकआउट के बीच इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, जबकि विपक्ष का आरोप है कि केवल सख्त कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह मजबूत करना होगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद अब सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल कराने, संगठित गिरोहों की भूमिका और तकनीकी माध्यमों से परीक्षा में धांधली करने वालों पर पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का दावा है कि यह कानून लाखों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम है।
अमित शाह ने कहा- युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वालों को मिलेगी कड़ी सजा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पारित होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि नया कानून उन अपराधियों के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार साबित होगा जो सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हैं। अमित शाह ने कहा कि योग्यता आधारित चयन प्रणाली से छेड़छाड़ करने वालों के लिए अब कोई राहत नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेहनत करने वाले छात्रों के अधिकार सुरक्षित रहें और उनका भविष्य किसी परीक्षा माफिया की वजह से प्रभावित न हो।
पेपर लीक पर अब 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना
नए कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को पहले की तुलना में और अधिक कठोर बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा की गोपनीयता भंग करने, नकल कराने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल कराने का दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद हो सकती है। इसके अलावा दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि सख्त सजा का प्रावधान भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में प्रभावी साबित होगा और परीक्षा माफियाओं के नेटवर्क पर अंकुश लगेगा।
संगठित अपराध पर और ज्यादा सख्ती
यदि किसी पेपर लीक या परीक्षा घोटाले में कोई संगठित गिरोह, एजेंसी या नेटवर्क शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में कम से कम 7 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में संगठित गिरोह सक्रिय पाए गए हैं। ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए कानून में यह विशेष प्रावधान जोड़ा गया है।
परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
संशोधित कानून के साथ सरकार परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने की दिशा में भी काम करेगी। प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, डिजिटल निगरानी, डेटा सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना न्यूनतम हो सके। सरकार का कहना है कि केवल अपराधियों को सजा देना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना भी जरूरी है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित हो।
राज्यसभा में विपक्ष ने जताया विरोध
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के कई सांसदों ने सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि केवल सख्त कानून बना देने से पेपर लीक की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करना, पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक सुधार भी उतने ही जरूरी हैं। चर्चा के दौरान विपक्षी गठबंधन के कई सदस्यों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट किया। इसके बावजूद सरकार ने ध्वनि मत से विधेयक पारित करा लिया। इससे पहले बुधवार को लोकसभा भी इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी।
सरकार का दावा- छात्रों का भविष्य होगा सुरक्षित
केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून देशभर में आयोजित होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा। सरकार के अनुसार, इस कानून से लाखों युवाओं का भरोसा परीक्षा प्रणाली में बढ़ेगा और वर्षों से सक्रिय परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।