महाराष्ट्र - महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में अभिजीत दिपके ने राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों ने लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।
सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि चाहे नरेंद्र हों, धर्मेंद्र हों या देवेंद्र, किसी की भी प्राथमिकता में शिक्षा दिखाई नहीं देती। उनका आरोप था कि सरकार छात्रों की समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीतिक तैयारियों में अधिक व्यस्त है। उन्होंने कहा कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की जरूरत है, लेकिन बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से उनकी उम्मीदों को झटका लग रहा है।
MPSC और TET परीक्षाओं का किया जिक्र
दिपके ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के कथित पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनके मुताबिक, यदि समय पर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते रहेंगे।
छात्रों के अधिकारों की लड़ाई का ऐलान
उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए राज्यभर में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं की आवाज सरकार तक पहुंचाना और भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाना होगा। उन्होंने छात्रों से भी इस मुहिम में साथ आने की अपील की।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
अभिजीत दिपके के इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, छात्र संगठन भी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग लगातार उठा रहे हैं।