Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है और यह 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। इस पूरे महीने भगवान शिव के साथ माता पार्वती की विशेष पूजा का भी विधान है। सावन के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और विवाह योग्य कन्याओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है, मंगल दोष शांत होता है और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
मंगला गौरी व्रत 2026 की तारीखें
सावन 2026 में कुल 4 मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे।
| मंगला गौरी व्रत | तारीख | दिन |
|---|---|---|
| पहला व्रत | 4 अगस्त 2026 | मंगलवार |
| दूसरा व्रत | 11 अगस्त 2026 | मंगलवार |
| तीसरा व्रत | 18 अगस्त 2026 | मंगलवार |
| चौथा व्रत | 25 अगस्त 2026 | मंगलवार |
इन व्रतों पर बन रहे विशेष संयोग
इस वर्ष मंगला गौरी व्रत पर दो महत्वपूर्ण धार्मिक संयोग भी बन रहे हैं।
11 अगस्त 2026 को मासिक शिवरात्रि का शुभ संयोग रहेगा।
25 अगस्त 2026 को भौम प्रदोष व्रत भी पड़ेगा।
ऐसे शुभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मंगला गौरी व्रत देवी पार्वती को समर्पित है। स्कंद पुराण और व्रतराज में इस व्रत का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करने पर-
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।
विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
कुंडली का मंगल दोष शांत होता है।
पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
पूजा की मुख्य विधि
पूजा स्थान पर चौकी रखकर सफेद और लाल वस्त्र बिछाएं।
माता मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
घी का दीपक जलाएं। परंपरा अनुसार आटे का दीपक बनाकर 16 बत्तियां लगाई जाती हैं।
माता को चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
षोडशोपचार विधि से पूजा करें।
16 संख्या का विशेष महत्व होने से 16 लौंग, 16 सुपारी, 16 इलायची, 16 पान, 16 लड्डू, 16 चूड़ियां एवं सुहाग सामग्री अर्पित करें।
पांच प्रकार के सूखे मेवे तथा सात प्रकार के अनाज भी चढ़ाएं।
अंत में मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण करें और दिनभर माता पार्वती का स्मरण करें।
मंगला गौरी व्रत संकल्प मंत्र
मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये।