कोलकाता: शारदीय दुर्गा पूजा के महासप्तमी पर्व की शुरुआत के साथ ही पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। शनिवार की सुबह कोलकाता समेत राज्य के अलग-अलग जिलों में गंगा घाटों पर नवपत्रिका स्नान की प्रक्रिया शुरू हुई। इस पारंपरिक अनुष्ठान को लेकर तड़के से ही घाटों पर श्रद्धालुओं और पूजा आयोजकों की आवाजाही बढ़ गई।
सुबह 5:15 बजे से शुरू हुआ कोलाबौ स्नान
महासप्तमी के अवसर पर सुबह 5:15 बजे से कोलाबौ स्नान का कार्यक्रम निर्धारित किया गया था। इसी समय को ध्यान में रखते हुए पूजा आयोजक सुबह-सुबह नवपत्रिका लेकर गंगा घाटों पर पहुंचने लगे। ढाक की गूंज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच घाटों पर धार्मिक माहौल बन गया। नवपत्रिका को सजाकर लाने वाले आयोजकों के साथ श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने महासप्तमी की सुबह को विशेष बना दिया।
बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा का अहम हिस्सा है नवपत्रिका स्नान
दुर्गा पूजा में महासप्तमी के दिन नवपत्रिका स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। बंगाल में इसे आम बोलचाल में 'कोलाबौ स्नान' भी कहा जाता है। इस परंपरा में केले के पौधे सहित नौ प्रकार के पौधों को एक साथ नवपत्रिका के रूप में तैयार किया जाता है। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार स्नान कराने के बाद नवपत्रिका को पूजा पंडाल में स्थापित किया जाता है। यह अनुष्ठान दुर्गा पूजा की पारंपरिक विधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ढाक की थाप के साथ घाटों पर पहुंचे पूजा आयोजक
महासप्तमी की सुबह कोलकाता के गंगा घाटों समेत विभिन्न जिलों के घाटों पर पूजा आयोजकों की चहल-पहल देखने को मिली। नवपत्रिका को सजाकर ढाक और अन्य वाद्ययंत्रों के साथ घाटों तक लाया गया। सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने के कारण घाटों पर उत्सव जैसा माहौल नजर आया। इस तरह नवपत्रिका स्नान के साथ बंगाल में दुर्गा पूजा के महासप्तमी अनुष्ठानों की शुरुआत हुई।