पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के निर्णायक चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर पहुंचे। यहां उन्होंने मतुआ समुदाय के प्रमुख धार्मिक स्थल ‘ठाकुरबाड़ी’ में हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर की विधिवत पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में शंखध्वनि और पारंपरिक मंत्रोच्चार के बीच पीएम का भव्य स्वागत किया गया।
चुनावी रणनीति या आस्था? मतुआ समुदाय पर फोकस
प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे मतुआ समुदाय को साधने की एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा इस प्रभावशाली समुदाय के जरिए उत्तर 24 परगना समेत कई सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
30 से ज्यादा सीटों पर असर, निर्णायक भूमिका में मतुआ वोट
मतुआ समुदाय का प्रभाव बंगाल की लगभग 30 से 34 विधानसभा सीटों पर माना जाता है। बांग्लादेश सीमा से सटे कई क्षेत्रों में भी इस समुदाय की निर्णायक भूमिका रहती है। 2021 चुनाव में भाजपा को इस समुदाय से बड़ा समर्थन मिला था, जिसे पार्टी 2026 में दोहराने की कोशिश कर रही है।
सामाजिक आंदोलन से उभरा मतुआ महासंघ
19वीं शताब्दी में हरिचंद ठाकुर द्वारा स्थापित मतुआ महासंघ सिर्फ धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और शिक्षा के जरिए नामशूद्र समुदाय के उत्थान का आंदोलन रहा है। यह समुदाय आज भी अपनी राजनीतिक और सामाजिक पहचान को लेकर अहम भूमिका निभाता है।
2019 और 2021 के बाद फिर ठाकुरनगर पहुंचे पीएम मोदी
यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने मतुआ समुदाय से जुड़ाव दिखाया हो। 2019 में भी उन्होंने ठाकुरनगर का दौरा किया था और 2021 में बांग्लादेश के ओराकंडी स्थित हरिचंद ठाकुर की जन्मस्थली पर जाकर भी श्रद्धांजलि दी थी।
CAA बहस के बीच बढ़ा राजनीतिक तापमान
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर चल रही बहस के बीच पीएम मोदी का यह दौरा और भी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे मतुआ समाज को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।