कोलकाता: बैंकिंग सेक्टर में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने समेत कई लंबित मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, सितंबर और अक्टूबर 2026 में देशव्यापी बैंक हड़तालें की जाएंगी। मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है।ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) के वरिष्ठ नेता और बैंक यूनियनों के प्रतिनिधि संजय दास ने कहा कि कर्मचारियों का उद्देश्य आम ग्राहकों को परेशान करना नहीं है। उनके मुताबिक, लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से ठोस पहल नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
2015 के समझौते का हवाला देकर 5-डे बैंकिंग की मांग
संजय दास ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांग 5-डे बैंकिंग व्यवस्था लागू करना है। उनके मुताबिक, 2015 में हुए द्विपक्षीय समझौते के दौरान दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा अन्य शनिवारों को भी अवकाश देने की दिशा में सहमति बनी थी। उनका कहना है कि समझौते को हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। बैंक यूनियनों ने इस मुद्दे पर वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और बैंक प्रबंधन के साथ कई बार बातचीत और पत्राचार किया, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।
खाली पदों को भरने की भी मांग
बैंक कर्मचारियों की ओर से बैंकों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की मांग भी उठाई गई है। संजय दास के अनुसार, पर्याप्त भर्ती नहीं होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर ग्राहकों को मिलने वाली बैंकिंग सेवाओं पर भी पड़ रहा है।उन्होंने कर्मचारियों की Performance Linked Incentive (PLI) व्यवस्था में कथित विसंगतियों और भेदभाव का मुद्दा भी उठाया। यूनियनों की मांग है कि ऐसी नीतियों की समीक्षा कर कर्मचारियों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म किया जाए। संजय दास ने स्पष्ट किया कि इन मांगों को लेकर मुख्य जिम्मेदारी केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग की है। इसलिए राज्य सरकारों से हस्तक्षेप की मांग करने के बजाय बातचीत केंद्र स्तर पर ही होनी चाहिए।
सितंबर में कई दिनों तक प्रभावित हो सकती हैं बैंक सेवाएं
प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक, 11 सितंबर को बैंक कर्मचारी एक दिन की देशव्यापी हड़ताल करेंगे। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार और रविवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में लगातार तीन दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसके बाद 26 और 27 सितंबर को सप्ताहांत अवकाश रहेगा, जबकि 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल प्रस्तावित है। इस वजह से सितंबर के आखिरी हिस्से में लगातार पांच दिनों तक बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। अगर मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से कोई समाधान नहीं निकलता है, तो यूनियनों ने 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी है।
ग्राहकों से असुविधा के लिए जताया खेद
संजय दास ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को पता है कि हड़ताल का सीधा असर आम ग्राहकों और बैंकिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने इसके लिए खेद जताते हुए कहा कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं, तो प्रस्तावित हड़ताल को टाला जा सकता है। बैंक यूनियनों की इन मांगों और प्रस्तावित हड़ताल को लेकर आने वाले दिनों में सरकार और बैंक प्रबंधन के साथ होने वाली बातचीत अहम मानी जा रही है।