कोलकाता: सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (SRFTI) में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। इसी बीच संस्थान प्रशासन ने छह विद्यार्थियों को निष्कासित करने का फैसला लिया है। प्रशासन ने छात्रों पर कुलपति और कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट, कार्यालय में तोड़फोड़, अनुशासनहीनता और परिसर में अश्लील टिप्पणियां लिखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, छात्र संघ ने निष्कासन की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी है। आंदोलन के 18वें दिन भी परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही। छात्रों के प्रदर्शन और प्रशासन के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने का मुद्दा भी है।
छायांकन, संपादन और फिल्म निर्माण विभागों के छात्रों पर कार्रवाई
एसआरएफटीआई प्रशासन ने संस्थान के छह विद्यार्थियों को निष्कासित करने का फैसला लिया है। संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, छायांकन, संपादन और फिल्म निर्माण समेत विभिन्न विभागों के डीन और विभागाध्यक्षों ने इस कार्रवाई पर निर्णय लिया। प्रशासन का आरोप है कि छात्रों के एक वर्ग ने अपने हितों को साधने के लिए पूरे मामले का राजनीतिकरण किया। इसके अलावा, परिसर की दीवारों और जमीन पर अश्लील टिप्पणियां लिखने का आरोप भी लगाया गया है। संस्थान प्रशासन ने इन घटनाओं को अनुशासनहीनता का गंभीर मामला बताया है। हालांकि, निष्कासित छात्रों की ओर से लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इस कार्रवाई के बाद संस्थान प्रशासन और छात्र संघ के बीच विवाद और गहरा गया है।
कुलपति और शिक्षकों से मारपीट का छात्रों पर आरोप
संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के एक वर्ग ने कुलपति और अन्य शिक्षकों के साथ मारपीट की। प्रशासन के मुताबिक, कार्यालय में तोड़फोड़ और परिसर में अनुशासन के उल्लंघन जैसी घटनाएं भी कार्रवाई की वजह बनीं। अधिकारी ने कहा कि संस्थान किसी भी विद्यार्थी का करियर बर्बाद नहीं करना चाहता, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में विभागों के डीन और प्रमुखों को निष्कासन का फैसला लेना पड़ा। प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी बताया गया है। दूसरी ओर, छात्र संघ ने निष्कासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। छात्र संघ का कहना है कि विद्यार्थियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
आंदोलन के 18वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन, कक्षाएं शुरू करने पर फैसला टला
एसआरएफटीआई परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों को लेकर छात्रों का आंदोलन शुक्रवार को 18वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। आंदोलन के कारण संस्थान में पढ़ाई और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कक्षाएं दोबारा शुरू करने के मुद्दे पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस संबंध में फैसला एक सप्ताह बाद लिया जाएगा। शनिवार से दुर्गा पूजा की छुट्टियां शुरू होने के कारण निर्णय को आगे बढ़ाया गया है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई कब सामान्य होगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आंदोलन की अवधि बढ़ने के साथ ही संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियों की बहाली एक बड़ी चुनौती बन गई है।
छात्र संघ ने निष्कासन को बताया अनुचित, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
छात्र संघ के प्रवक्ता सुदीप चक्रवर्ती ने निष्कासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि पांच छात्रों को अनुचित तरीके से निष्कासन के ई-मेल भेजे गए हैं। छात्र संघ ने इस कार्रवाई को चुनौती देने के लिए कानूनी कदम उठाने की बात कही है। संघ का आरोप है कि कुलपति संतोष अजमेरा ने परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर पहले हुए समझौते का पालन नहीं किया। छात्र संघ के मुताबिक, कुलपति के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए पुलिस को बुलाया गया था। हालांकि, ये आरोप छात्र संघ की ओर से लगाए गए हैं और इन पर प्रशासन का पक्ष अलग हो सकता है। इस पूरे मामले में अब कानूनी कार्रवाई की संभावना ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।
सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर फिर बढ़ा विवाद
एसआरएफटीआई में जारी आंदोलन के बीच सीसीटीवी कैमरे लगाने का मुद्दा एक बार फिर विवाद की वजह बन गया है। छात्र संघ का दावा है कि आंदोलन के 17वें दिन विद्यार्थियों को पता चला कि प्रशासनिक भवन की पहली मंजिल पर बिना पूर्व सूचना के कैमरे लगाए जा रहे हैं। संघ के अनुसार, वर्ष 2024 में 16 दिनों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कैमरे लगाने की जगह तय करने की प्रक्रिया में छात्र संघ को शामिल करने पर सहमति बनी थी। छात्र संघ ने यह भी दावा किया कि 30 सितंबर को हुई बैठक में कुलपति ने कैमरे लगाने से तीन दिन पहले सूचना देने का आश्वासन दिया था। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने इस सहमति का पालन नहीं किया। इसी के विरोध में विद्यार्थियों ने प्रशासनिक भवन की पहली मंजिल पर कब्जा कर लिया। छात्र संघ ने इस कदम को शांतिपूर्ण विरोध बताया है, जबकि कैमरों को लेकर प्रशासन और छात्रों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं।
आगे क्या होगा?
एसआरएफटीआई में जारी गतिरोध के बीच अब सबकी नजर प्रशासन और छात्र संघ के अगले कदमों पर है। छह विद्यार्थियों के निष्कासन के फैसले ने आंदोलन को और गंभीर बना दिया है। एक ओर प्रशासन अनुशासनहीनता और कथित मारपीट की घटनाओं को कार्रवाई का आधार बता रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्र संघ निष्कासन और सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। छात्र संघ ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जबकि कक्षाएं शुरू करने का फैसला भी फिलहाल टल गया है। दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियां कब बहाल होंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में विवाद के समाधान के लिए प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत की दिशा महत्वपूर्ण होगी।