कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अब सार्वजनिक तौर पर नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी के सामने अब संगठन को एकजुट रखना बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।
राज चक्रवर्ती ने राजनीति से लिया संन्यास
बैरकपुर से तृणमूल के पूर्व विधायक और फिल्म निर्माता राज चक्रवर्ती ने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि 2021 में शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर 2026 के साथ खत्म हो गया। उन्होंने भाजपा को जीत की बधाई देते हुए बंगाल के फिल्म उद्योग में सौहार्द और कलात्मक स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील भी की।
I-PAC और संगठनात्मक अहंकार पर उठे सवाल
बीरभूम के पूर्व विधायक विकास रॉय चौधरी ने चुनावी हार के लिए पार्टी में राजनीतिक सलाहकारों के बढ़ते प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि पार्टी ज़मीनी कार्यकर्ताओं से कट गई थी। वहीं, पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ घोष ने दावा किया कि पार्टी दो गुटों में बंट चुकी थी और कई फैसलों पर अभिषेक बनर्जी का दबाव रहता था।
सुजॉय चक्रवर्ती का इस्तीफा, लगाए गंभीर आरोप
हावड़ा नगर निगम के पूर्व प्रशासक डॉ. सुजॉय चक्रवर्ती ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी फंड के लिए पैसे जुटाने का दबाव बनाया गया था। इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर संकट और गहरा गया है।
मनोज तिवारी और रिजू दत्ता भी नाराज़
पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मंत्री मनोज तिवारी ने भी पार्टी नेतृत्व पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि गुटबाज़ी के कारण हावड़ा में विकास कार्य प्रभावित हुए। वहीं, तृणमूल प्रवक्ता रिजू दत्ता ने सोशल मीडिया पर भावुक वीडियो जारी कर कहा कि चुनाव के दौरान उनसे पार्टी लाइन पर बयान दिलवाए गए थे। उन्होंने अपनी कई टिप्पणियों को “पार्टी निर्देश” का हिस्सा बताया।