कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) के स्थापना दिवस को लेकर तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान अब अदालत तक पहुंच गई है। 28 अगस्त को कोलकाता के मेयो रोड स्थित गांधी प्रतिमा के सामने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर पार्टी के दो गुट आमने-सामने हैं। दोनों पक्ष एक ही स्थान पर सभा आयोजित करने की अनुमति मांग रहे हैं और इस सिलसिले में कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। सोमवार को कालीघाट समर्थक तृणमूल गुट की ओर से अदालत में याचिका दायर कर मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की गई। मामला न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष रखा गया, जिसके बाद अदालत ने सुनवाई के लिए इसे स्वीकार कर लिया।
एक ही दिन और एक ही जगह कार्यक्रम की तैयारी
कालीघाट गुट का आरोप है कि 28 अगस्त के TMCP स्थापना दिवस कार्यक्रम के लिए कोलकाता पुलिस से जुलाई के अंत से ही अनुमति मांगी जा रही थी। कई बार पत्र भेजे जाने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद गुट ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक गुट ने भी उसी दिन मेयो रोड पर सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी है। इस गुट की ओर से भी अदालत में याचिका दायर की गई है। इस तरह एक ही तारीख और एक ही स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की दोनों पक्षों की तैयारी ने प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है।
TMCP स्थापना दिवस बना शक्ति प्रदर्शन का मंच
28 अगस्त का TMCP स्थापना दिवस इस बार सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहने वाला है। पार्टी के भीतर बदलते समीकरणों के बीच दोनों गुट इसे अपने समर्थन और संगठनात्मक प्रभाव के प्रदर्शन के तौर पर देख रहे हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित अंदरूनी मतभेद और गुटीय राजनीति को लेकर चर्चा तेज हुई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अपने राजनीतिक प्रभाव को अलग तरीके से पेश कर रहा है, जबकि कालीघाट समर्थक खेमे का संगठन पर अपना दावा कायम है। ऐसे में 28 अगस्त को मेयो रोड पर होने वाली सभा दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन बन सकती है।
अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
एक ही स्थान पर दोनों पक्षों की ओर से कार्यक्रम की अनुमति मांगे जाने के बाद अब अदालत की सुनवाई अहम हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश से यह स्पष्ट हो सकता है कि मेयो रोड पर प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर प्रशासन किस पक्ष को अनुमति देगा और किन शर्तों के साथ सभा आयोजित की जा सकेगी। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और पुलिस-प्रशासन के फैसले पर दोनों गुटों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों की भी नजर रहेगी।