29 जुलाई, 2026 को, राज्य सचिवालय नबन्ना में एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है कि महज़ 1 अगस्त से पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी विद्यालयों में दिए जाने वाले मिड डे मील में अब अंडे भी शामिल किए जायेंगे। जहाँ इससे पहले सुवेंदु ने ये घोषणा की थी कि मिड डे मील का सारा दायित्व इस्कॉन को सौंपा जाएगा जो बच्चों को सात्विक भोजन प्रदान करेगी।
विपक्ष के हमलों और पोषण विवाद के बाद सरकार की नई व्यवस्था
स्कूलों में इस्कॉन (ISKCON) द्वारा भोजन आपूर्ति की शुरुआती योजना के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। विपक्ष और अभिभावकों का तर्क था कि केवल सात्विक और शाकाहारी भोजन देने से बच्चों की नियमित प्रोटीन खुराक प्रभावित हो सकती है और मिड-डे मील से अंडों को हटाना बच्चों के स्वास्थ्य के साथ समझौता होगा। इस विवाद को शांत करने और बच्चों के पोषण का संतुलन बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने नया मॉडल पेश किया है। इसके तहत इस्कॉन अपनी ओर से शुद्ध सात्विक आहार ही तैयार करके सप्लाई करेगा, जबकि राज्य सरकार अलग से स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups - SHGs) के माध्यम से छात्रों को उबले अंडे उपलब्ध कराएगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कोलकाता से होगी शुरुआत
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जानकारी दी कि 1 अगस्त से इस योजना को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कोलकाता के अधिकांश सरकारी और सहायता प्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लागू किया जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे राज्य के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा। जो छात्र या परिवार धार्मिक या व्यक्तिगत कारणों से अंडा नहीं खाते हैं, उनके लिए फल या अन्य पौष्टिक विकल्प दिए जाने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।
बजट में वृद्धि और बुनियादी ढांचे के कायाकल्प का खाका
सरकार ने मिड-डे मील योजना के तहत प्रति छात्र दैनिक आवंटन को मौजूदा 6.78 रुपए से बढ़ाकर 10 रुपए कर दिया है, ताकि भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को सुधारा जा सके। इसके साथ ही नबन्ना के कार्यक्रम के दौरान 80,375 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 296.64 करोड़ की राशि सीधे नेट बैंकिंग के जरिए हस्तांतरित की गई। मुख्यमंत्री ने वादा किया है कि राज्य के सभी स्कूलों में लकड़ी या कोयले के बजाय एलपीजी गैस पर खाना पकाया जाएगा, सौर ऊर्जा पैनल लगाए जाएंगे और स्वच्छ पेयजल व शौचालयों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर होगा।