कोलकाता: पश्चिम बंगाल की दो हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों—नंदीग्राम और रेजिनगर—पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राज्य का राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। निर्वाचन आयोग की घोषणा के अनुसार, इन दोनों सीटों पर आगामी 6 अक्टूबर को मतदान होगा। चुनाव प्रक्रिया के तहत 16 सितंबर तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे और 19 सितंबर नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि तय की गई है। ये दोनों सीटें शुभेंदु अधिकारी और हुमायूं कबीर के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई हैं। इस बीच, राज्य वाममोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) ने दोनों सीटों पर अपने आधिकारिक प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर दिया है।
नंदीग्राम से सीपीआई के शांतिगोपाल गिरि मैदान में, सीपीआईएम ने छोड़ी सीट
साल 2026 के विधानसभा चुनाव में दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़कर भवानीपुर सीट अपने पास रखी। इस बार वाममोर्चा में सीट समझौते के तहत सीपीआईएम ने नंदीग्राम सीट अपनी सहयोगी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के लिए छोड़ दी है। सीपीआई की ओर से शांतिगोपाल गिरि 'हंसिया-बाल' (कास्ते-दानेर शीश) चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरेंगे। उल्लेखनी है कि 2021 के चुनाव में इस सीट पर आईएसएफ उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार पुराने समीकरण को तोड़ते हुए सीट वापस वाम सहयोगी सीपीआई के पास आई है।
रेजिनगर से सीपीआईएम के प्रत्याशी घोषित, वाम घटक RSP में नाराजगी
मुर्शिदाबाद जिले की रेजिनगर विधानसभा सीट पर वाममोर्चा ने सीपीआईएम उम्मीदवार के रूप में विशिष्ट अधिवक्ता सैयद को मैदान में उतारा है। हालांकि, इस सीट को लेकर वाममोर्चा के घटक दल आरएसपी (RSP) की दावेदारी को सीपीआईएम ने दरकिनार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच द्विपक्षीय बातचीत में कोई अंतिम फैसला होने से पहले ही सीपीआईएम द्वारा एकतरफा उम्मीदवार घोषित करने से आरएसपी नेतृत्व में भारी असंतोष है।
कांग्रेस ने उतारे नए चेहरे, टीएमसी खेमे में अलग सियासी चर्चा
दूसरी ओर, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने भी दोनों सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजिनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाही काफ़ी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। 2026 के आम चुनाव में लड़ चुके प्रत्याशियों की जगह कांग्रेस ने नए चेहरों पर दांव लगाया है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के नेता मदन मित्रा ने बयान दिया है कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से दोबारा चुनाव लड़ती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी का गुट वहां कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा ताकि बीजेपी विरोधी वोटों का विभाजन रोका जा सके।