कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के साथ ही एक नया विवाद गहरा गया है। राज्य में शराब की दुकानें बंद रखने (Dry Day) की अवधि को लेकर चुनाव आयोग और राज्य आबकारी विभाग के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। सामान्यतः मतदान से 48 घंटे पहले शराबबंदी लागू होती है, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 96 घंटे कर दिया गया है।
आयोग की अनभिज्ञता: ‘हमसे नहीं पूछा गया’
राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने इस फैसले पर हैरानी जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग (ECI) की गाइडलाइन केवल 48 घंटे की है। अग्रवाल ने कहा- "आबकारी विभाग ने जो सर्कुलर जारी किया है, वह आयोग की सलाह या मंजूरी के बिना है। हम विभाग से पूछेंगे कि आखिर 48 घंटे के नियम को बढ़ाकर 96 घंटे क्यों किया गया और उन इलाकों में भी दुकानें क्यों बंद हैं जहाँ मतदान नहीं है।"
आबकारी विभाग का नया फरमान
जिलाधिकारियों और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को भेजे गए पत्र में आबकारी विभाग ने 'वर्तमान परिस्थिति की गंभीरता' का हवाला दिया है। निर्देश के अनुसार:
प्रथम चरण: 20 से 23 अप्रैल (4 दिन) तक शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।
द्वितीय चरण: 25 अप्रैल से 29 अप्रैल तक फिर से शराबबंदी लागू रहेगी।
परिणाम दिवस: 4 मई (मतगणना के दिन) भी ड्राई डे घोषित किया गया है।
बाइकों पर भी कड़ा पहरा
शराबबंदी के साथ-साथ आयोग ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोटर बाइक के इस्तेमाल पर भी नई शर्तें थोपी हैं। चुनाव से 2 दिन पहले किसी भी बाइक रैली की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बाइक चलाने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
जनता में भ्रम की स्थिति
आबकारी विभाग के इस अचानक और 'स्वैच्छिक' फैसले से कोलकाता सहित पूरे राज्य में शराब व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच हड़कंप मच गया है। चुनाव के दौरान 96 घंटे की लंबी तालाबंदी बंगाल के इतिहास में पहली बार देखी जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य चुनाव अधिकारी की पूछताछ के बाद आबकारी विभाग क्या सफाई देता है।