कोलकाता : लोकसभा चुनावों में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। राजनीतिक सरगर्मी तेज है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यानी शिक्षक-शिक्षिकाएं निर्वाचन आयोग के नए-नए निर्देशों से भ्रमित और परेशान हैं। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया है कि चुनाव ड्यूटी से छूट मांगकर वापस स्कूलों में लौटने के लिए शिक्षकों की जिलाधिकारी (DM) कार्यालय के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं।
BLO या पोलिंग ऑफिसर? दोहरी जिम्मेदारी का संकट
पिछले नवंबर से ही बड़ी संख्या में शिक्षक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में ड्यूटी कर रहे हैं। अभी तक पूरक मतदाता सूची (Supplementary List) जारी होने का सिलसिला जारी है, जिसके कारण शिक्षकों को BLO के पद से 'रिलीज़ लेटर' नहीं मिला है। शिक्षकों की शिकायत है कि:
- BLO की ड्यूटी के साथ-साथ उन्हें अब फर्स्ट या सेकंड पोलिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी भी सौंपी जा रही है।
- एक ही व्यक्ति एक साथ दो अलग-अलग भूमिकाएं कैसे निभाएगा, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
- बैलेट वोटिंग और घर-घर जाकर वोटर स्लिप देने जैसे अतिरिक्त कामों ने शिक्षकों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
मध्यमग्राम के एक BLO सुरजीत घोष का कहना है, "जब हमें BLO नियुक्त किया गया था, तो नियुक्ति पत्र मिला था। अब अगर काम खत्म हो गया है, तो रिलीज़ लेटर क्यों नहीं दिया जा रहा? बिना छुट्टी दिए नई ड्यूटी थोपना सरासर गलत है।"
ट्रेनिंग का समय और बढ़ता तनाव
मालदा के एक प्राथमिक स्कूल के शिक्षक शेख मासूम अख्तर ने बताया कि ट्रेनिंग के शेड्यूल ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। "जिस दिन बैलेट वोट संबंधी ट्रेनिंग के लिए बीडीओ (BDO) ऑफिस बुलाया जा रहा है, उसी दिन पोलिंग ऑफिसर की ट्रेनिंग के लिए भी आदेश आ रहा है। शिक्षक जाएं तो कहां जाएं?" इस आपाधापी में पिछले कई महीनों से स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह ठप हो गई है।
शिक्षिका की मौत और बढ़ता डर
हाल ही में डायमंड हार्बर-1 ब्लॉक की एईआरओ (शिक्षिका) मालविका राय भट्टाचार्य की मृत्यु के बाद शिक्षकों में आक्रोश और भी बढ़ गया है। उनके परिवार का आरोप है कि अत्यधिक चुनावी दबाव और मानसिक तनाव के कारण उनकी जान गई। इस घटना ने चुनाव ड्यूटी कर रहे अन्य शिक्षकों को डरा दिया है।
संकट में भविष्य: कौन सोचेगा छात्रों का?
वर्तमान में स्कूलों में परीक्षाओं की तैयारी चल रही है। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मूल्यांकन तक का काम अटका हुआ है। दमदम की अनामिका चक्रवर्ती का कहना है कि घर-घर जाकर जानकारी जुटाने और वरिष्ठ नागरिकों के बैलेट पेपर से मतदान कराने की ड्यूटी के कारण वे स्कूल को समय नहीं दे पा रही हैं।
आयोग का रुख
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, इन समस्याओं से जुड़ी ढेरों शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आयोग इन शिकायतों की समीक्षा कर रहा है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि किसी एक व्यक्ति पर काम का बोझ असहनीय न हो जाए