कोलकाता | निजी प्रतिनिधि पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों का सीधा असर अब पश्चिम बंगाल के चमड़ा उद्योग पर दिखने लगा है। कोलकाता और बनतला लेदर कॉम्प्लेक्स को केंद्र में रखकर ढाला गया यह विशाल आर्थिक ढांचा अब त्रिकोणीय दबाव में है। एक तरफ कच्चे माल की आसमान छूती कीमतें, तो दूसरी तरफ परिवहन में देरी और निर्यात में गिरावट— कुल मिलाकर राज्य की हजारों छोटी और मध्यम इकाइयां गहरे अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हैं।
कच्चे माल की कीमतों में आग: टैनरी मालिकों की बढ़ी मुसीबत
सबसे बड़ा झटका पेट्रोलियम आधारित रसायनों (Chemicals) की कीमतों से लगा है। चमड़ा प्रसंस्करण और जूते बनाने में इन रसायनों का उपयोग अनिवार्य है। युद्ध के प्रभाव के कारण इनकी कीमतें 20% से 80% तक बढ़ गई हैं। Council for Leather Exports (CLE) के आंकड़ों के अनुसार:
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कुल उत्पादन लागत में कम से कम 30% की वृद्धि हुई है।
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छोटी और मध्यम इकाइयां इस बढ़े हुए खर्च के बोझ तले दब रही हैं।
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लागत को नियंत्रित न कर पाने के कारण कई कारखाने उत्पादन कम करने को मजबूर हैं।
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा भारी असर!
कारखानों की इस बढ़ी हुई लागत का अंतिम बोझ आम उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। उद्योग जगत की आशंका है कि:
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खुदरा बाजार में जूतों की कीमतें 50% से 60% तक बढ़ सकती हैं।
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सिर्फ जूते ही नहीं, बेल्ट और बैग जैसे अन्य चमड़े के उत्पादों के दाम भी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकते हैं।
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निर्माताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, तो व्यवसाय चलाना संभव नहीं होगा।
निर्यात में गिरावट: क्या विदेशी बाजार खो रहा है भारत?
कोलकाता और पश्चिम बंगाल से यूरोप और अमेरिका में भारी मात्रा में चमड़े के उत्पादों का निर्यात होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इस निर्यात में 40% तक की गिरावट आने की आशंका है। उत्पादन लागत बढ़ने और डिलीवरी में देरी के कारण विदेशी खरीदारों का भरोसा कम हो रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।
परिवहन जाम और आसमान छूता किराया
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अशांति के कारण जहाजों को लंबा वैकल्पिक मार्ग लेना पड़ रहा है। इसका सीधा असर समय और पैसे दोनों पर पड़ रहा है:
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समय: पहले यूरोप माल पहुँचने में 23 दिन लगते थे, अब 32 से 33 दिन लग रहे हैं।
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लागत: हवाई माल ढुलाई (Air Freight) का खर्च लगभग तीन गुना बढ़ गया है। समुद्री मार्ग से परिवहन खर्च में 10% - 20% की वृद्धि हुई है।
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किल्लत: एयर कार्गो में जगह की कमी के कारण तेजी से माल भेजने के विकल्प भी सीमित हो गए हैं।
एक नजर में पश्चिम बंगाल का चमड़ा उद्योग:
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राज्य में कुल टैनरियां: 550
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बनतला लेदर कॉम्प्लेक्स में स्थित इकाइयां: 120
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जुड़े हुए उत्पाद निर्माण इकाइयां: लगभग 3,000
भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता
पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था में चमड़ा उद्योग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाखों लोगों की आजीविका इस उद्योग से जुड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो यह संकट और गहरा सकता है। उत्पादन में कमी और विदेशी ऑर्डर हाथ से निकलना बंगाल के इस पारंपरिक उद्योग को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचा सकता है।