बुधवार को भारतीय शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुला। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की रिकॉर्ड गिरावट के बीच बाजार पर दबाव बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक तक कमजोर पड़ा, जबकि निफ्टी 23,500 के स्तर से नीचे फिसल गया। BSE Sensex और NIFTY 50 दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट और घरेलू आर्थिक संकेतकों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव
निफ्टी 50 सूचकांक 23,457.25 पर खुला, जो पिछले बंद स्तर से 160.75 अंक नीचे था। वहीं सेंसेक्स 74,806.49 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 394 अंक से ज्यादा फिसल गया। कुछ समय बाद गिरावट और तेज हुई, जिससे सेंसेक्स करीब 600 अंक नीचे चला गया। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और तेल कीमतों में तेजी ने बाजार की चाल कमजोर कर दी है। कई सेक्टरों में बिकवाली देखी गई, जिससे व्यापक बाजार लाल निशान में रहा।
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.88 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा में यह गिरावट आयात लागत बढ़ा सकती है और महंगाई को और तेज कर सकती है। कमजोर रुपया विदेशी निवेश को भी प्रभावित करता है। इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है और निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
कच्चा तेल और वैश्विक तनाव का असर
Brent Crude Oil की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति संकट के चलते ऊर्जा बाजार अस्थिर बना हुआ है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिसका असर महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक खर्च पर पड़ता है। यही वजह है कि बाजार में दबाव बना हुआ है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट
बुधवार के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे। ऑटो, एफएमसीजी, मीडिया, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में ज्यादा कमजोरी दिखी।
निफ्टी ऑटो में 1.30% गिरावट
निफ्टी एफएमसीजी में 0.90% गिरावट
निफ्टी मीडिया में 1.96% गिरावट
निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.27% गिरावट
निफ्टी रियल्टी में 1.78% गिरावट
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ऊर्जा संकट का असर आने वाले दिनों में बाजार पर और दिखाई दे सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कमजोर मानसून की आशंका, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। आने वाले दिनों में चौथी तिमाही के नतीजे और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल पर असर डाल सकते हैं।