कोलकाता: कोलकाता में 21 जुलाई 'शहीद दिवस' के अवसर पर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया। जहाँ एक तरफ बिड़ला तारामंडल के सामने तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी गुट) का शक्ति-प्रदर्शन हुआ, वहीं दूसरी ओर कोलकाता के मेयो रोड (Mayo Road) पर गांधी मूर्ति के पास बागी नेताओं का सम्मेलन आयोजित किया गया। इस समानांतर जनसभा का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने 1993 के शहीदों के परिजनों के लिए 10,000 की मासिक सहायता देने का बड़ा ऐलान किया।
10,000 प्रति माह वित्तीय सहायता की घोषणा
मेयो रोड के मंच से 1993 की पुलिस फायरिंग में मारे गए 13 युवा कार्यकर्ताओं के परिवारों का मुद्दा उठाते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा: “तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों के ब्याज का पैसा किसे मिलना चाहिए? हमारी ओर से पहला और सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह होगा कि 21 जुलाई 1993 के सभी 13 शहीद परिवारों को पार्टी कोष से हर महीने 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता राशि दी जाएगी। इतने सालों तक शहीदों के नाम पर केवल राजनीति की गई, लेकिन उनके परिवारों का वास्तविक ख्याल किसी ने नहीं रखा।”
ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर तीखे प्रहार
ऋतब्रत बनर्जी ने अपने संबोधन में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर सीधा निशाना साधते हुए निम्नलिखित सवाल उठाए:
- पार्टी के पैसों और ब्याज पर सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फ्रीज किए गए खातों से हर साल 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज बनता है। उन्होंने पूछा कि यह पैसा जमीनी कार्यकर्ताओं तक पहुँचना चाहिए या किसी एक परिवार की जेब में जाना चाहिए।
- पारदर्शिता का वादा: उन्होंने घोषणा की कि यदि उनके गुट को पार्टी खातों के संचालन का अधिकार मिलता है, तो वे हर तीन महीने में खर्च का ब्योरा जनता के सामने रखेंगे।
- 'असली बनाम नकली' तृणमूल: ऋतब्रत ने दावा किया कि उनके साथ तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक सांगठनिक ढांचा, निर्वाचित प्रतिनिधि और संस्थापक कार्यकर्ता खड़े हैं।
तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) की प्रतिक्रिया
मेयो रोड पर हुए इस आयोजन और ऋतब्रत बनर्जी द्वारा किए गए ऐलानों को तृणमूल कांग्रेस के मुख्य गुट ने सिरे से खारिज कर दिया। टीएमसी नेताओं का कहना है कि 21 जुलाई के आंदोलन का असली प्रतीक केवल ममता बनर्जी हैं और विरोधी पक्ष शहीद दिवस के बहाने भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।
कोलकाता की सड़कों पर हुए इस समानांतर आयोजन और ₹10,000 प्रति माह के ऐलान ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी विभाजन की जंग अब नीतिगत फैसलों और शहीद परिवारों के दावों तक पहुँच गई है।