कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली चेहरा रहे शुभेंदु अधिकारी अब राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगने के बाद बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को करीब 15 हजार वोटों से हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक कद और भी बड़ा हो गया है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद अब वे पहली बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
राजनीतिक परिवार से रखते हैं संबंध
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में हुआ था। उनके पिता शिशिर अधिकारी राज्य की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। अधिकारी परिवार का मेदिनीपुर और आसपास के इलाकों में मजबूत राजनीतिक प्रभाव माना जाता है।
आंदोलन से बनाई अलग पहचान
शुभेंदु अधिकारी को जमीनी राजनीति का मजबूत नेता माना जाता है। साल 2007 के भूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। इसी आंदोलन के बाद वे बंगाल की राजनीति में तेजी से उभरे और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए। उनकी संगठन क्षमता और जनता के बीच पकड़ ने उन्हें राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया। पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर, झाड़ग्राम और बांकुड़ा जैसे इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
सांसद से मंत्री तक का सफर
शुभेंदु अधिकारी तामलुक लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं। इसके बाद ममता बनर्जी सरकार में उन्होंने परिवहन मंत्री और सिंचाई मंत्री जैसे अहम विभाग संभाले। टीएमसी सरकार में रहते हुए वे संगठन और प्रशासन दोनों स्तर पर बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते थे।
टीएमसी छोड़ बीजेपी में हुए शामिल
साल 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। बीजेपी में आने के बाद उन्होंने भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और हिंदुत्व जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को लगातार घेरा। धीरे-धीरे वे भाजपा के सबसे बड़े बंगाली चेहरे बनकर उभरे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाते हुए सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया।
भवानीपुर जीत ने बदल दी राजनीति
इस बार के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को करीब 15 हजार वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। इस जीत को बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। भाजपा की रिकॉर्ड जीत के बाद विधायक दल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना।
अब मुख्यमंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में शुभेंदु अधिकारी की रणनीति, संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ की अहम भूमिका रही है। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने विकास, कानून व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।