पश्चिम एशिया में जारी युद्ध तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो पिछले लगभग 45 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले यह कीमत करीब 72.87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, जिससे अब तक लगभग 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस तेजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई चिंता पैदा कर दी है।
भारतीय रिफाइनरियों के मुनाफे पर संभावित असर
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक हुई वृद्धि का सीधा प्रभाव भारतीय रिफाइनरियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियां, जैसे आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को फिलहाल स्थिर रखने की स्थिति में हो सकती हैं। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि बीते समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से इन कंपनियों को पर्याप्त लाभ मिला था, जबकि खुदरा कीमतों में उसी अनुपात में कमी नहीं की गई थी।
तेल कंपनियों के मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों के दौरान इन तीन प्रमुख तेल कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनका कुल शुद्ध लाभ लगभग 57,810 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह करीब 19,768 करोड़ रुपये था। इस प्रकार लाभ में लगभग 192 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से फिलहाल उपभोक्ताओं पर तुरंत मूल्य वृद्धि का बोझ डालने की संभावना कम हो सकती है।
युद्ध की दिशा पर निर्भर करेगा भविष्य का रुझान
ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और अधिक नहीं बढ़ता और ऊर्जा अवसंरचना प्रभावित नहीं होती, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें 120 से 130 डॉलर प्रति बैरल के बीच ही सीमित रह सकती हैं। सोमवार के कारोबार के दौरान कुछ समय बाद कीमतों में हल्की नरमी भी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार अभी भी स्थिति का आकलन कर रहा है।
भारत में पेट्रोल और डीजल कीमतों की स्थिति
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कुछ समय से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। मार्च 2024 के मध्य में इनकी कीमतों में प्रति लीटर दो रुपये की कमी की गई थी। इसके बाद से इनकी दरों में बहुत अधिक बदलाव नहीं हुआ है। राजधानी दिल्ली में वर्तमान में पेट्रोल लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 87.67 रुपये प्रति लीटर के आसपास उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों की अस्थिरता से बचाने के लिए उत्पाद शुल्क में मौजूद संतुलन का उपयोग कर सकती है।
सरकार की नीतिया दे सकती हैं राहत
विश्लेषकों के अनुसार सरकार के पास पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क के रूप में पर्याप्त राजस्व संरचना मौजूद है, जिसके माध्यम से वह अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता के प्रभाव को कुछ हद तक नियंत्रित कर सकती है। पिछले वर्ष जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें कम हुई थीं, तब सरकार ने उससे मिलने वाले लाभ का एक हिस्सा राजस्व के रूप में भी एकत्र किया था। इस कारण यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और अधिक नहीं बढ़तीं, तो आम उपभोक्ताओं पर तत्काल अतिरिक्त बोझ पड़ने से बचाया जा सकता है।
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