छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड (2003) में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके सरेंडर की डेडलाइन पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी और सजा की कार्रवाई पर अस्थायी विराम लग गया है।
सीबीआई और हाईकोर्ट फैसले को चुनौती
अमित जोगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो अहम आदेशों को चुनौती दी गई थी—पहला सीबीआई को अपील की अनुमति और दूसरा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का वह फैसला जिसमें उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने दोनों मामलों में सुनवाई के बाद सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा
गौरतलब है कि बिलासपुर हाई कोर्ट ने जोगी को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 23 अप्रैल तक सरेंडर करने का आदेश दिया था। इसी आदेश पर अब सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
क्या है पूरा मामला
4 जून 2003 को रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अमित जोगी समेत 29 लोगों को आरोपी बनाया गया था। शुरुआती ट्रायल में उन्हें बरी किया गया था, लेकिन बाद में हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दे दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ फैसला
सुनवाई के दौरान जोगी पक्ष ने दलील दी कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। कोर्ट ने इस आधार पर फिलहाल सजा पर रोक लगाते हुए अंतरिम राहत दी है और मामले की आगे की सुनवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं।
राजनीति में बढ़ी हलचल
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। समर्थक इसे राहत बता रहे हैं, जबकि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है।