पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के तहत 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान शुरू हो गया है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और मतदाता बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं, जिसमें केंद्रीय बलों की व्यापक तैनाती की गई है। इस चरण में मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है, जिससे सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है।
शुभेंदु अधिकारी का हमला—‘फर्जी वोटर हटे तो हार तय’
नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी ने मतदान के बीच बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची से फर्जी नाम, मृतक वोटर और घुसपैठियों के नाम हट गए हैं, तो टीएमसी की जीत की कोई संभावना नहीं है। अधिकारी ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के सभी पोलिंग एजेंट्स से बातचीत की है और उन्हें शांतिपूर्ण मतदान की उम्मीद है। हालांकि उनके इस बयान ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है और टीएमसी खेमे में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है।
टीएमसी पर आरोप-‘टिकट बेचने और उम्मीदवार तोड़ने का खेल’
आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने भी टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के कई उम्मीदवारों को पैसे देकर तोड़ा गया और टीएमसी में शामिल कराया गया। कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी ने 142 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 25-26 उम्मीदवार टीएमसी में चले गए, लेकिन इसके बावजूद 117 उम्मीदवार मैदान में हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी किसी की “बी टीम” नहीं है और जनता इस चुनाव में जवाब देगी।
जनता और खिलाड़ियों की अपील—शांतिपूर्ण मतदान जरूरी
एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन ने भी लोगों से शांतिपूर्ण मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने वोट का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि मजबूत सरकार बन सके। वहीं, कई महिला मतदाताओं ने सुरक्षा और रोजगार को चुनाव का बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों में रोजगार के अवसर नहीं बढ़े, जिससे युवाओं में असंतोष है।
जमीनी हालात-कतारों में वोटर, बढ़ी सियासी सरगर्मी
सिलीगुड़ी, देशबंधु जिला पुस्तकालय और अन्य कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक मतदाता उत्साह के साथ वोट डाल रहे हैं। हालांकि, आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह चुनाव सिर्फ वोटिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नैरेटिव की लड़ाई भी बन गया है—जहां भाजपा “फर्जी वोटर” का मुद्दा उठा रही है, वहीं टीएमसी इसे राजनीतिक आरोप करार दे रही है।