मध्य प्रदेश में 25-30 वर्षों से नियमित और स्थाई किये जाने का राह देख रहे विभिन्न विभागों और निगम मंडलों, विश्वविद्यालयों में कार्य करने वाले 2 लाख संविदा कर्मचारियों और 3 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। आज मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वारा सरकार को सिंगल बेंच के उस निर्णय पर स्टे देने से मना कर दिया, जिसमें 9 अप्रैल को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने निर्णय दिया था कि जिन संविदा कर्मचारियों को 10 वर्ष हो गये हैं उन्हें जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित करने के लिए म.प्र. सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 अक्टूबर 2016 को वर्गीकृत कर स्थाई कर्मी बनाया था और वेतनमान भत्ते दिये थे।
साथ में मंहगाई भत्ता तथा प्रतिवर्ष इन्क्रीमेंट दिये जाने का प्रावधान किया था। उसी प्रकार संविदा कर्मचारियों 7 अक्टुबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। सिंगल बैंच के इस निर्णय के विरोध में राज्य सरकार के अधिवक्ता ने आज बुधवार को डबल बैच में स्थगन के लिए याचिका लगाई थी। माननीय उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने स्थगन देने से इंकार करते हुए कहा कि यह एक बहुत बड़े वर्ग का सवाल है, इसलिए हम इस पर स्थगन नहीं देंगें आप सिंगल बेंच में अपना पक्ष रखिए और निर्णय का पालन कीजिए।
संविदा कर्मचारियों में इस निर्णय से खुशी की लहर
मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने म.प्र. जबलपुर हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुये कहा कि हम आभारी माननीय न्यायलय के जिन्होंने 5 लाख शोषित पीड़ित संविदा कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के दर्द को समझा हैं। हम पिछले 25 से 30 वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे थे, और शोषित हो रहे था। हर बार संविदा कर्मचारियों को संविदा नवीनीकरण के नाम पर हर वर्ष शोषण सहना पड़ता था और बार बार नौकरी से हटाने की धमकी भी देते थे कि तुम संविदा कर्मचारी हो हटा देंगें। वेतनमान और भत्ते नहीं मिलते थे महंगाई भत्ता और प्रतिवर्ष इंक्रीमेंट नहीं मिलता था, सरकारी मकान आवंटन नहीं होता था संविदा कर्मचारियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता था। विभिन्न विभागों में कार्य करने वाले लाखों संविदा कर्मचारियों में इस निर्णय से खुशी की लहर है।
रमेश राठौर ने मुख्यमंत्री से मांग की
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अब संविदा कर्मचारियों के साथ न्याय करते हुए माननीय उच्च न्यायालय निर्णय का पालन करते हुए जिन संविदा कर्मचारियों को दस वर्ष हो गये हैं उन्हें स्थाई कर्मचारी बनाते हुये नियमित वेतनमान, मंहगाई भत्ता, इन्क्रीमेंट प्रदान किया जाए।