नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का एक अहम जरिया है। नौकरी के दौरान कर्मचारी और कंपनी दोनों की ओर से PF खाते में योगदान किया जाता है, जिस पर सरकार ब्याज देती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि नौकरी से रिटायर होने के बाद भी PF खाते में जमा रकम पर कुछ समय तक ब्याज मिलता रह सकता है। ऐसे में बिना कोई नया पैसा जमा किए भी आपकी बचत बढ़ सकती है। आइए जानते हैं EPF से जुड़े इस नियम और इसके तहत मिलने वाले फायदे के बारे में।
रिटायरमेंट के बाद भी बढ़ सकती है PF की रकम
आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद अपने PF खाते से पूरी रकम निकालने की योजना बनाते हैं। हालांकि, EPF के नियमों के मुताबिक, 58 साल की उम्र में रिटायर होने के बाद भी कर्मचारी के खाते में जमा रकम पर अगले तीन साल तक ब्याज मिल सकता है। यानी अगर आप तुरंत PF का पैसा नहीं निकालते हैं, तो आपकी जमा पूंजी पर ब्याज जुड़ता रह सकता है।
₹50 लाख की रकम तीन साल में हो सकती है ₹63 लाख से ज्यादा
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की उम्र 58 साल है और रिटायरमेंट के समय उसके PF खाते में 50 लाख रुपये जमा हैं। अगर वह इस रकम को तुरंत नहीं निकालता है और सालाना ब्याज दर 8.25 फीसदी रहती है, तो तीन साल में उसकी जमा रकम बढ़कर करीब 63.42 लाख रुपये हो सकती है। इस तरह कर्मचारी को बिना कोई अतिरिक्त निवेश किए लगभग 13.42 लाख रुपये का ब्याज मिल सकता है।
कितनी रकम पर कितना मिलेगा फायदा?
अगर 50 लाख रुपये की जमा राशि पर 8.25 फीसदी सालाना ब्याज की दर से गणना करें, तो तीन साल में मिलने वाला अनुमानित फायदा इस प्रकार होगा।
रिटायरमेंट के समय PF में जमा रकम: ₹50 लाख
सालाना ब्याज दर: 8.25%
ब्याज मिलने की अवधि: 3 साल
तीन साल बाद अनुमानित कुल रकम: ₹63.42 लाख
कुल ब्याज से कमाई: करीब ₹13.42 लाख
तीन साल बाद क्या होगा PF खाते का?
EPF के नियमों के अनुसार, 58 साल की उम्र में रिटायर होने के बाद अगले तीन साल तक खाते में जमा रकम पर ब्याज मिल सकता है। इसके बाद अगर खाते में कोई योगदान नहीं होता है, तो वह निष्क्रिय (Inoperative) हो सकता है और उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद PF खाते से जुड़ा फैसला लेने से पहले इसके नियमों को समझना जरूरी है।
ब्याज दर में बदलाव से बदल सकती है रकम
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 8.25 फीसदी ब्याज दर के आधार पर 63.42 लाख रुपये का उदाहरण दिया गया है। EPFO हर वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर तय करता है। ऐसे में आने वाले वर्षों में ब्याज दर में बदलाव होने पर मिलने वाली कुल रकम भी कम या ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा EPF में जमा एकमुश्त रकम और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन अलग-अलग सुविधाएं हैं। दोनों को एक ही नहीं समझना चाहिए। कुल मिलाकर, रिटायरमेंट के बाद PF की रकम निकालने में जल्दबाजी करने के बजाय उससे जुड़े ब्याज और निकासी के नियमों की जानकारी रखना फायदेमंद हो सकता है।