नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर सोमवार को घरेलू बाजार पर देखने को मिला। बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर कारोबार करने लगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार बने रहने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इस बीच सोने और चांदी की कीमतों में मामूली तेजी दर्ज की गई। बाजार में बिकवाली के दबाव के बीच निवेशक अब वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बाजार में गिरावट की वजह क्या है और निवेशकों को इस माहौल में किस तरह सावधानी बरतनी चाहिए।
शेयर बाजार में आज क्या-क्या हुआ?
सोमवार को कारोबार की शुरुआत के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी 50 शुरुआती कारोबार में 22,524.40 के स्तर पर पहुंचा और इसमें 75.60 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 72,990.04 के स्तर पर खुला और 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत नीचे रहा। बाजार में बिकवाली का दबाव रहने से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 114.19 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव की आशंका गहराई। दूसरी ओर, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,431 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 1,97,028 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई, जिनमें क्रमशः 0.29 प्रतिशत और 0.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 0.61 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.40 प्रतिशत और सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.43 प्रतिशत गिरा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ खुला।
बाजार गिरने की असली वजह क्या है?
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का 114 डॉलर प्रति बैरल के पार बने रहना भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है, इसलिए कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर देश की महंगाई, रुपये की कीमत और कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है, जिससे कीमतों में तेजी को सहारा मिल रहा है। इसके अलावा, पिछले सप्ताह मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में आई भारी गिरावट के बाद मार्जिन पर कारोबार करने वाले कुछ निवेशकों को अपनी पोजीशन बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस तरह की जबरन बिकवाली बाजार में गिरावट को और तेज कर सकती है। वैश्विक अनिश्चितता और बिकवाली के दबाव के बीच निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते हुए बाजार की दिशा पर नजर रख रहे हैं।
किस सेक्टर में लगा झटका और कहां दिखी मजबूती?
सोमवार को बाजार में ज्यादातर क्षेत्रों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला, हालांकि कुछ क्षेत्रों ने गिरावट के बीच मजबूती भी दिखाई। निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 2.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी का संकेत मिला। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी 0.92 प्रतिशत, ऑटो 0.42 प्रतिशत, एफएमसीजी 0.27 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सूचकांक 0.28 प्रतिशत नीचे रहा। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार के समग्र रुख को प्रभावित किया। दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया, निफ्टी फार्मा और निफ्टी प्राइवेट बैंक गिरावट के बीच हरे निशान में कारोबार करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल रहे। शेयरों की बात करें तो श्रीराम फाइनेंस, इंफोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और एनटीपीसी प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे। वहीं, कोटक महिंद्रा बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, मैक्स हेल्थकेयर, सन फार्मा और एक्सिस बैंक में बढ़त देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में कमजोरी के बावजूद सभी क्षेत्रों और कंपनियों पर एक जैसा असर नहीं पड़ा।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
बाजार में गिरावट के दौरान निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपनी निवेश रणनीति की समीक्षा करना जरूरी है। केवल बाजार में गिरावट देखकर घबराहट में शेयर बेचने से बचना चाहिए, खासकर तब जब निवेश लंबे समय के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया हो। हालांकि, जिन निवेशकों ने मार्जिन या उधार के पैसे से कारोबार किया है, उन्हें जोखिम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि तेज उतार-चढ़ाव में नुकसान बढ़ सकता है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और मौजूदा मूल्यांकन को समझना जरूरी है। निवेशकों को अपना पूरा पैसा एक ही शेयर या क्षेत्र में लगाने के बजाय विविधता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए। बाजार में नई खरीदारी करने से पहले वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और बाजार की चाल को देखना उपयोगी हो सकता है। वहीं, अल्पकालीन कारोबार करने वालों को बिना स्पष्ट योजना के जोखिम लेने से बचना चाहिए। ध्यान रहे कि बाजार में गिरावट के दौरान भी निवेश से जुड़े फैसले व्यक्तिगत जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार ही लेने चाहिए।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के हालात की अहम भूमिका रह सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत की आयात लागत और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसके उलट, तनाव में कमी आने और तेल की आपूर्ति सामान्य होने से बाजार को राहत मिल सकती है। निवेशक विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर रखेंगे। वैश्विक बाजारों का रुख घरेलू निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है। आईटी, बैंकिंग, फार्मा और ऑटो जैसे क्षेत्रों में आगे होने वाली खरीदारी या बिकवाली से भी बाजार की चाल प्रभावित होगी। हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर बाजार की आगे की दिशा का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे ताजा आंकड़ों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर फैसले लें तथा बिना सोचे-समझे जोखिम उठाने से बचें।