अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक आयात शुल्क उनके कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कार्यकारी शाखा को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन करना अनिवार्य है तथा मनमाने ढंग से शुल्क लगाने से वैश्विक व्यापार संतुलन प्रभावित होता है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और नया अस्थायी शुल्क
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि 24 फरवरी 2026 से आगामी 150 दिनों तक अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी शुल्क लगाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शुल्क पहले लगाए गए 25 से 50 प्रतिशत शुल्कों की तुलना में काफी कम है, जिससे भारत सहित कई देशों को व्यापारिक राहत मिलेगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए राहत के संकेत
पिछले वर्ष अगस्त माह में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क लगाया था। इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क भी लगा दिया गया था, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भारतीय वस्तुओं पर यह कुल कर भार घटकर मात्र 10 प्रतिशत रह जाएगा।
भारतीय व्यापार विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि यह फैसला भारत के लिए बेहद सकारात्मक है। उन्होंने बताया कि अब भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक होंगे क्योंकि पारस्परिक शुल्क घटकर केवल 10 प्रतिशत रह गया है। हालांकि यह शुल्क अमेरिका में लागू एमएफएन शुल्क के अतिरिक्त रहेगा, फिर भी कुल कर बोझ काफी कम हो जाएगा।
वैश्विक व्यापार पर संभावित प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार यह फैसला वैश्विक व्यापार में स्थिरता लाने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय विश्व व्यापार संगठन के मानकों के अनुरूप है। साथ ही इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई ऊर्जा आएगी और भारत के कई क्षेत्रों जैसे वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान, दवा उद्योग और ऑटो पार्ट्स के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले ने न केवल भारत बल्कि कई देशों को एक बड़ा व्यापारिक अवसर प्रदान किया है। आने वाले समय में इस निर्णय के व्यापक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिलेंगे और भारत-अमेरिका के आर्थिक संबंध और अधिक सुदृढ़ होने की संभावना है।
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