Indore: मध्य भारत की अब तक की सबसे महंगी पेंटिंग इंदौर में बनकर तैयार हुई है। इसकी कीमत भारतीय मुद्रा में एक करोड़ रुपये है। इसे शाजापुर जिले में जन्मे और दशकों से इंदौर में रह रहे ख्यात चित्रकार ईश्वरी रावल ने एक वर्ष, पांच माह की कठोर साधना से तैयार किया है। इन दिनों यह पेंटिंग मुंबई की जगप्रसिद्ध जहांगीर आर्ट गैलरी में प्रदर्शित की गई है। गैलरी में इसे इसकी कीमत एक करोड़ रुपये के साथ प्रदर्शित किया गया है।
पेंटिंग में हनुमान मां सीता को खोज रहे
यह पेंटिंग भारत (Indore) के प्राणों में बसे श्रीराम के जीवन से जुड़ी है। इसमें हनुमानजी श्रीलंका में मां सीता को खोज रहे हैं। पेंटिंग चार हिस्सों में बनी है। प्रत्येक हिस्सा एक श्लोक पर आधारित है। चित्रकार रावल ने इसमें अपनी साधना में संवेदना को मिलाकर रंगों के जरिए इस तरह बयां किया है की इसमें मां सीता की विरह वेदना और हनुमान की व्याकुलता जीवंत हो उठती है।
पहला हिस्सा : हनुमान श्रीलंका के एक पर्वत पर बैठे हैं और पूरी लंका को देख रहे हैं। वे महागर्जना करके उड़ते हैं तो पर्वत चूर-चूर होकर बिखरता है।
श्लोक : पादाभ्यां पीड़ितस्तेन महाशैलो महात्मना। ररास सिंहाभितो महान मत्त इव दिप:।।
दूसरा हिस्सा : हनुमान मां सीता को रावण के महल में कक्ष-दर-कक्ष जाकर खोज रहे हैं। कहीं नर्तकियां सो रही हैं, तो कहीं वाद्य यंत्रों के साथ वादक विश्राम मुद्रा में हैं। यहां रावण के अहंकार के प्रतीक दस शीश दिखाए गए हैं।
श्लोक : व्यावृत्तकच पीन वस्त्र प्रकीर्ण वर भूषण। पान व्यायाम कालेषु निद्रोपहत चेतस:।
तीसरा हिस्सा : हनुमान मां सीता को खोजते हुए महल के उस हिस्से में पहुंचते हैं, जहां मंदोदरी सो रही हैं। हनुमान उन्हें ही मां सीता समझकर प्रसन्न हो उछल-कूद करते हैं। किंतु तभी उनकी दृष्टि मंदोदरी के गहनों पर जाती है। समझ जाते हैं कि यह महारानी है, न कि मां सीता।
श्लोक : स तां दृष्टाव महाबाहुर भूषितां मारुतात्मज:। तर्कयामास सीतेति रूप यौवन सम्पदा।।
चतुर्थ हिस्सा : पेंटिंग के इस हिस्से में मां सीता अशोक वाटिका में वृक्ष के नीचे सो रही हैं। दुख, आक्रोश, व्याकुलता, व्यथा आदि के कारण उनका चेहरा व एक हाथ लाल हो गया है। हनुमान उन्हें देख द्रवित हैं।

एक बड़े हाल की दीवार जितनी बड़ी पेंटिंग
मां सीता की खोज नामक यह पेंटिंग आम पेंटिंग्स से पांच गुना बड़ी है। यह इतनी बड़ी है कि हाल की एक पूरी दीवार पर लग पाती है।
जानें कौन हैं ईश्वरी रावल
वर्ष 1976 में विद्यार्थी के रूप में इंदौर (Indore) आए ईश्वरी रावल फिर यहीं के होकर रह गए। उन्होंने स्त्री पात्रों को केंद्र में रखकर सैकड़ों पेंटिंग्स बनाई हैं। देश की तमाम बड़ी गैलरियों में उनकी पेंटिंग्स लगी हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त रावल की ख्याति देशभर में है। उनकी पेंटिंग्स भारत के तमाम शहरों सहित दुबई, कनाडा, ब्रिटेन में रहने वाले लोगों द्वारा खूब पसंद की जाती हैं।
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