एमपी में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। कांग्रेस इस बार कोई भी चूक नहीं करना चाहती जिससे उसे सत्ता से दूर रहना पड़े। इसी क्रम में आदिवासियों को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस राज्य में उलगुलान अभियान चलाने जा रही है। आदिवासी बाहुल्य विधानसभा इलाकों में स्थानीय समाजिक संगठनों का विचार सम्मेलन होगा। बता दें कि, मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद इसका आयोजन करेगा। सभी अनुसूचित जनजाति वर्ग को एक साथ लाने के लिए यह अभियान होगा। सभी जिले की परिषद इकाई अपने क्षेत्र में विधानसभा वार उलगुलान कार्यक्रम का प्रदेश की समिति के साथ कार्यक्रम का आयोजन करेंगी।
उलगुलान अभियान के तहत इन मुद्दों पर होगी चर्चा
आपको बता दें कि, एमपी कांग्रेस के उलगुलान अभियान में पैसे कानून पर चर्चा, आरक्षण पर चर्चा रोजगार गारंटी पर चर्चा, वन अधिकार पर चर्चा, वोट का अधिकार पर चर्चा, स्वास्थ्य पर चर्चा, शिक्षा पर चर्चा, जननायक एवं महापुरुषों की जीवन गाथा का वर्णन -स्थानीय जन समस्या पर चर्चा, सामाजिक एकता अखंडता पर चर्चा राजनैतिक सोच निर्मित करना और जल जंगल जमीन 5वीं अनुसूचि एवं 6वीं अनुसूची पर चर्चा शामिल है।कलेक्टर के भरोसे आदिवासी क्यों काम करें?
कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने इसेलेकर पत्रकारों से कहा कि, ट्राइबल काउंसिल आदिवासियों की बनती है, लेकिन वह सिर्फ नाम है। इस बार जो ट्राइबल काउंसिल बने, उसको अधिकार मिलें, ताकि वह काम कर सके। पूर्व मंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि, मैं तो कहता हूं कि प्रदेश में सरकार आए, तो छठवीं अनुसूची क्यों नहीं लागू करते ? कलेक्टर के भरोसे आदिवासी क्यों काम करें? आदिवासी के माध्यम से उस जिले, उस गांव का काम होना चाहिए। इसके लिए ट्राइबल काउंसिल, छठी अनुसूची होना चाहिए। उन्होंने आगे पत्रकारों को बताया कि, आप को समझना पड़ेगा कि ऐसे कौन लोग हैं, जो कांग्रेस में रहकर आदिवासियों को रोक रहे हैं। उस पर भी विचार करना चाहिए।Read More: राजस्थान में जमकर बरसे PM मोदी, कहा - कांग्रेस सरकार में प्रधानमंत्री के ऊपर भी शासक थे
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