भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान एमपी के जिन स्थानों से पथ गमन (Shriramchandra Path) किया था, उनका विकास सरकार करेगी। इसके लिए श्री रामचंद्र पथ गमन न्यास का गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। न्यास राम पथ गमन मार्ग के स्थानों को चिन्हित कर उनके विकास कार्य की निगरानी करेगा। निर्माण विभागों के बीच समन्वय का काम भी न्यास ही देखेगा। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय गुरुवार को मंत्रालय में होने वाली कैबिनेट बैठक में लिया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में मिल सकती है हरी झंडी (Shriramchandra Path)
सरकार चाहती है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान प्रदेश के जिन स्थानों से पथ गमन किया था, उन्हें विकसित किया जाए ताकि श्रद्धालु उन स्थलों का भ्रमण कर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श से प्रेरणा ले सकें।
परियोजना क्रियान्वयन इकाई का गठन होगा
जो न्यास गठित होगा वह चिह्नित स्थलों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक विकास के लिए सुझाव देगा। सांस्कृतिक तथा पर्यटन की दृष्टि से विकास, संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निर्माण विभागों के बीच समन्वय का काम भी न्यास ही देखेगा। इसमें मुख्यमंत्री सहित 33 न्यासी होंगे। अशासकीय न्यासियों का कार्यकाल तीन वर्ष का रहेगा। इसके मुख्य कार्यपालन अधिकारी संचालक संस्कृति होंगे। न्यास शासन और अन्य माध्यमों से अनुदान या दान प्राप्त कर सकेगा। परियोजना क्रियान्वयन इकाई का गठन होगा।
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