Mission-65: भारतीय जनता पार्टी मिशन-65 (Mission-65) की तैयारियों में जुटी हुई है। यही कारण है कि पार्टी की तैयारियों में किसी प्रकार की चूक ना हो जाए उसके लिए पार्टी अलग-अलग प्रकार के फॉर्मूला आजमा रही है। पार्टी ना सिर्फ प्रदेश की जनता का मिजाज समझने का प्रयास कर रही है बल्कि कार्यकर्ताओं का मिजाज क्या है उसे भी समझने का प्रयास कर रही है। भाजपा ने कार्यकर्ताओं का मूड समझने के लिए 14 नेताओं की नियुक्त की थी, जिन्हें प्रदेश के अलग-अलग जिलों का जिम्मा सौंपा गया था।
इन नेताओं को नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का जिम्मा भी सौंपा गया था। लेकिन जब यह सभी नेता भोपाल लौटे तो कहीं ना कहीं इनके चेहरे पर मायूसी ही देखने को मिली है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में संगठन के प्रति नहीं लेकिन सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। कार्यकर्ता जब किसी मंत्री अथवा विधायक के पास काम लेकर जाते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती। यही कारण है कि कार्यकर्ता सरकार से काफी नाराज हैं।
Mission-65 से संशय में बीजेपी के कार्यकर्ता
कार्यकर्ताओं के बीच में एक और बड़ा मुद्दा है। जिस प्रकार से 65 प्लस (Mission-65) की बात बीच-बीच में उठती है, उससे भी बीजेपी के कार्यकर्ता संशय की स्थिति में हैं। कार्यकर्ताओं को इस बात का डर है कि, अगर उनका नेता 65 पार कर चुका है, तो उनके नेता को टिकट नहीं मिलेगा। उसके बदले जब दूसरे नेता को टिकट मिलेगा तो कार्यकर्ताओं को उसका साथ देना है या नहीं। इस मामले की उस वक्त पुष्टि हो गई जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री गोपाल भार्गव से बात हुई। इसको लेकर मंत्री भार्गव ने कहा कि पार्टी में 65 प्लस जैसी कोई बात नहीं है लेकिन उन्होंने इसके तुरंत बाद कहा कि पार्टी अगर कोई भी काम देगी तो वो करने के लिए तैयार रहें।
ट्रांसफर पोस्टिंग जैसे मुद्दे भी बन रहे नाराजगी का कारण
भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि, चुनाव नेता नहीं बल्कि कार्यकर्ता जितवाते हैं। लेकिन जब कार्यकर्ता ही सरकार से नाराज हो तो ऐसी स्थिति में पार्टी की नैया कैसे पार लग पाएगी। अलग-अलग क्षेत्रों से फीडबैक लेकर नेताओं का मानना है कि, कार्यकर्ताओं के छोटे-छोटे कार्य होते हैं जैसे ट्रांसफर और पोस्टिंग। लेकिन जब वे मंत्रियों और विधायकों के पास जाते हैं तो उन्हे वहां किसी प्रकार का महत्व नहीं दिया जाता है।
यही कारण है कि कार्यकर्ता इस वक्त खुद की ही सरकार से नाराज हैं। अब भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने का फॉर्मूला ढूंढ रही है। चुनाव के लिए महज छह महीने का वक्त बचा है और पार्टी ने ना सिर्फ 51 फीसदी वोट शेयर का लक्ष्य रखा है बल्कि अबकी बार 200 पार का नारा भी दिया है। कार्यकर्ताओं के मिले फीडबैक से जाहिर है कि यही स्थिति चुनाव तक बनी रही तो पार्टी अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगी।
Written By: Sandeep Mishra
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