प्रदेश का सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख त्योहार हरेली है। इसे लेकर किसानों और ग्रामीणों ने तैयारी शुरू कर दी है। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में हरेली त्योहार का बड़ा महत्व है। प्रदेश का सबसे पहला पर्व (तिहार) हरेली है। फसल की बुवाई के बाद इस उत्सव को धूमधाम से मनाया जाता है। कृषि औजारों की पूजा कर पारंपरिक खेलों का लुत्फ लिया जाता है।
विकास एवं उन्नति का प्रतीक
हरेली त्योहार हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से खेती-बाड़ी से जुड़ा होता है और इसे कृषि के विकास एवं उन्नति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। हरेली का अर्थ है "हरा" और "ली" का मतलब "लाना" होता है, यानी हरियाली लाना। इस दिन किसान अपनी फसलों की बुवाई की तैयारी करते हैं और अपने खेतों में नई फसल के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा, हरेली पर लोग अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और नए उपकरणों को खरीदने का भी काम करते हैं। यह त्योहार समाज में एकता और खुशहाली का संदेश भी देता है। इस दिन, लोग पारंपरिक गीत गाते हैं, नृत्य करते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर हर्षोल्लास मनाते हैं। यह त्योहार न केवल कृषि के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा और संतुलन का भी प्रतीक है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
सावन माह की अमावस्या तिथि 3 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। वहीं इस तिथि का समापन 4 अगस्त को दोपहर 4 बजकर 42 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार सावन की हरियाली अमावस्या रविवार 4 अगस्त को मनाई जाएगी। हरियाली अमावस्या के दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से लेकर 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा।
युवा और बच्चे गेड़ी चढ़ने का मजा लेते है
हरेली में किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और मीठे व्यंजन का आनंद लेते हैं। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में युवा और बच्चे गेड़ी चढ़ने का मजा लेते हैं। इसलिए, सुबह से ही घरों में गेड़ी बनाने का काम शुरू हो जाता है। इस दिन, कुछ लोग बहुत ऊंची गेड़ी बनवाते हैं। कुछ स्थानों पर गेड़ी दौड़ प्रतियोगिता भी आयोजित होती है।
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