किसान आंदोलन का अब मध्य प्रदेश में भी असर दिखेगा। संयुक्त किसान मोर्चा के 2 लाख किसान दिल्ली कूच करेंगे। 24 फरवरी को एमपी के किसान दिल्ली पहुंचेंगे। पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर डटे किसानों के साथ आंदोलन में शामिल होंगे। एमएसपी समेत 5 मांगों को लेकर हफ्तेभर से किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं। बीते 1 हफ्ते से किसान पांच मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसमें किसानों की तीन मांगे प्रमुख हैं। पहली मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून बनाना, दूसरी मांग स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करना और तीसरी मांग देश के सभी किसानों की कर्ज माफी की है। वहीं भू अधिग्रहण कानून को वापस लेने और किसानों पर लगे मुकदमों को वापस लेने की भी मांग है।
यह लड़ाई आर-पार की
किसान नेता शिवकुमार कक्का ने बताया कि सरकार लगातार मांगों को लेकर बातचीत कर रही है। लेकिन अब यह लड़ाई आर-पार की होगी। अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे किसानों ने इस बात का समर्थन किया है कि मांग नहीं पूरी होने की दशा में देश के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे लंबा चलने वाला यह आंदोलन होगा।
किसान सरकार को अपनी ताकत का एहसास कराएंगे
किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि अब देश भर से किसान सरकार को अपनी ताकत का एहसास कराएंगे। दक्षिणी राज्यों से भी इस आंदोलन का समर्थन किसान कर रहे हैं। दिल्ली में देश के अलग-अलग हिस्सों से एकजुट हो रहे किसानों को रोकने के लिए सरकार हर तरीके के हथकंडे अपना रही है। पंजाब और हरियाणा बॉर्डर पर किसानों पर गोली चलाई जा रही है, गोले दागे जा रहे हैं। सरकार किसानों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है जैसा पाकिस्तानी सेना के साथ किया जाता है।
किसान आंदोलन पर गर्म हुई सियासत
वहीं किसान आंदोलन को लेकर सियासी पारा भी चढ़ा हुआ है। कांग्रेस ने किसानों की सभी मांगों को सही ठहराते हुए आंदोलन का समर्थन किया है। एमपी कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा ने बताया कि किसानों को ठगने का काम केंद्र और राज्य सरकार ने किया है। लिहाजा हर स्तर पर किसान कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। उधर, बीजेपी नेता दीपक विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार किसानों के हित में ही निर्णय लेती है। वार्ताओं का दौर भी जारी है। किसानों के इस आंदोलन में बाहरी असामाजिक तत्वों द्वारा हिंसक रंग दिया जा रहा है। बीजेपी ने किसानों से आंदोलन समाप्त करने की अपील करते हुए सावधान रहने की नसीहत भी दी।
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