प्रदेश की सियासत में एकबार फिर मदरसे का पाठ शुरु हो गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (CM Shivraj) चौहान के नेतृत्व में गृह विभाग की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित पुलिस विभाग के सभी अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे शामिल हुए। लेकिन मदरसा सियासत में चर्चा का केन्द्र बना।
मदरसों का होना चाहिए रिव्यू
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj) ने बैठक के दौरान निर्देश दिया कि अवैध मदरसे जहां कट्टरता का पाठ पढ़ाया जा रहा है उनका रिव्यू होना चाहिए। कट्टरता और अतिवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इस बैठक पर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी सहमति जताते हुए कहा कि अगर स्कूलों का रिव्यू हो सकता है तो मदरसों का क्यों नहीं।
कांग्रेस नेताओं ने जताई आपत्ति
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि अवैध रुप से संचालित हो रहे मदसरों पर बुलडोजर भी चलना चाहिए। जहां भी राष्ट्रविरोधी गतिविधियां संचालित होती हैं उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। सत्ता और संगठन की ओर से बयान जारी होते ही कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले पर आपत्ति जाहिर की है। उनका मानना है कि जितने भी मदरसे संचालित हो रहे हैं, उन सभी को सरकार से मान्यता प्राप्त है। किसी भी मदरसे में कुछ गलत नहीं पढ़ाया जाता है। इस समय राजधानी भोपाल में सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या 468 है। इससे पहले बाल आयोग के निरीक्षण में भी कई मदरसों में व्यापक गड़बड़ी सामने आई थी।
CM Shivraj ने मदरसों की तालीम पर खड़ा किया सवाल
जब भी चुनाव करीब आते हैं तब मदरसों या उससे जुड़ी गतिविधियों पर सवाल खड़े होने लगते हैं। जिस प्रकार से सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मदरसों की तालीम पर सवाल खड़ा किया है उससे मुस्लिम वर्ग के कुछ लोग सरकार की नीयति पर सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का यह मानना है कि भाजपा सरकार चुनाव में इस बात को मुद्दा बना कर चुनावी लाभ उठाना चाहती है। हांलाकि, सरकार की मानें तो उन्हें मदरसों और उनकी शिक्षा से कोई आपत्ति नहीं है। सरकार को कुछ जगहों से शिकायतें मिली हैं कि कुछ जगहों पर अवैध रुप से मदरसे संचालित हो रहे हैं और उनमें कट्टरता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इससे प्रदेश का भविष्य खराब हो सकता है।
Written By: Sandeep Mishra
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