Bhopal: पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (Sumitra Mahajan) ने मध्य प्रदेश के साल 2023 के बजट पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस बजट में महिलाओं के लिए लाई गई योजनाओं पर उन्होंने कहा कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक मेहनती होती हैं। उन्हें थोड़ा भी आधार और सहारा मिलता है तो वे काफी आगे बढ़ सकती हैं। मध्य प्रदेश के बजट में सरकार ने इसी सोच के साथ महिलाओं के लिए कई प्रविधान किए हैं। लाड़ली बहना योजना हो या प्रतिभावान बालिकाओं को स्कूटी देने की योजना, यह सब इसी दृष्टिकोण से प्रेरित है।
लाड़ली बहना योजना को लेकर कही ये बात
सुमित्रा महाजन ने कहा कि यह कहना आसान है कि चुनावी साल में पेश हो रहे इस बजट पर चुनाव की छाप है, लेकिन मेरा मानना है कि यह महिलाओं के प्रति सम्मान और स्पष्ट सोच का बजट है। पहले लाड़ली लक्ष्मी योजना और अब लाड़ली बहना… यह बालिकाओं के बाद महिलाओं को आगे बढ़ाने की ही दूरदर्शिता है। लाड़ली लक्ष्मी योजना आने के बाद बेटियों के प्रति समाज की सोच बदली है। उसी तरह लाड़ली बहना योजना उसकी अगली कड़ी मानी जा सकती है।
स्वच्छ भारत मिशन पर ये कहा
उन्होंने आगे स्वच्छ भारत मिशन को लेकर कहा कि सरकार पूरी तरह आपकी गृहस्थी नहीं चला सकती, केवल सहारा दे सकती है। सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, आपके लिए बेहतर इंतजाम जुटा सकती है। इसके बाद तो लोगों को जागरूक होकर खुद ही खड़ा होना पड़ेगा और सरकार की योजनाओं से ऐसा हो भी रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (Sumitra Mahajan) के तहत गांवों का खुले में शौच से मुक्त होना इसका बेहतर उदाहरण है। इस योजना से गांवों की तस्वीर बदली है। महिलाओं के लिए खुले में शौच लज्जा का विषय था, लेकिन सरकार ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के घरों में शौचालय बनवाकर ग्रामीण समाज को भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया। अब ग्रामीण क्षेत्र में लोग स्वयं के खर्च पर भी शौचालय बनवा रहे हैं। यह बड़ा बदलाव है। महिलाओं के स्वयं सहायता समूह भी उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
महिलाओं को मिलेगा लाभ
उन्होंने आगे कहा कि सरकार के छोटे से आधार ने महिलाओं का मनोबल बढ़ाया है। ग्रामीण क्षेत्र में घूंघट से ही सही, लेकिन महिलाओं ने धीरे-धीरे समझना शुरू किया है कि वे भी घर-परिवार और समाज में कितना महत्व रखती हैं। स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आदि के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए बजट प्रविधान भी गांवों में कहीं न कहीं महिलाओं को ही लाभ पहुंचाएंगे। ऐसा मैं इसलिए कह रही हूं कि ग्रामीण क्षेत्र में पुरुष वर्ग तो फिर भी दूर जाकर इलाज करवा लेता है, लेकिन महिलाएं ऐसा नहीं कर पाती।
महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखना होगा
उन्होंने कहा कि गांवों में स्वास्थ्य की ढांचागत सुविधाएं बेहतर होंगी तो महिलाओं को तत्काल उपचार की सुविधा मिल सकेगी। महिलाओं के लिए योजनाएं और बजट लाकर सरकार तो अपनी जिम्मेदारी बेहतर (Sumitra Mahajan) ढंग से निभा रही है, लेकिन इसके बाद की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को चाहिए कि वे इन योजनाओं का लाभ समाज के उस वर्ग और उन महिलाओं तक पहुंचाएं जो इसके वास्तविक हकदार हैं। एक महती जिम्मेदारी समाज की भी बनती है।
उन्होंने आगे कहा कि हमें महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखना होगा। हम बालिकाओं से तो संस्कारों की उम्मीद करते हैं, लेकिन बालकों को संस्कार देने के प्रति उदासीन रहते हैं। पुरुष वर्ग को चाहिए कि वह लड़कों को भी सिखाए कि लड़कियों और महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, तभी महिलाओं के प्रति पूरे समाज का दृष्टिकोण बदलेगा।
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