मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला वर्सेज कमाल मौला मस्जिद को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की दायर याचिका पर अहम सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता के अनुसार, भोजशाला धर्मस्थल उपासना अधिनियम से संबंधित नहीं है, इसलिए इसकी मूल याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता के दावे के अनुसार, भोजशाला का मुद्दा काशी-मथुरा और अयोध्या के समान है। याचिका में कहा गया है कि भोजशाला धर्मस्थल उपासना अधिनियम से संबंधित नहीं है, इसलिए इसकी मूल याचिका की सुनवाई की जानी चाहिए। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे की रिपोर्ट के क्रियान्वयन पर रोक लगाई है, जिसे हटाने की मांग की जा रही है। बता दें कि, सर्वे के दौरान कमाल मौला वेल फेयर सोसाइटी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। एक अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हाई कोर्ट के आदेश से चल रहे सर्वे को यथावत जारी रखा जाए। एएसआई की रिपोर्ट आने के बाद भी मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
याचिकाकर्ता की मांग
याचिकाकर्ता आशीष गोयल का तर्क है कि, भोजशाला धर्मस्थल उपासना अधिनियम से संबंधित नहीं है और इसका संरक्षण एएसआई द्वारा किया जा रहा है और प्रधान न्यायाधीश द्वारा विभिन्न धार्मिक स्थलों की सुनवाई एक साथ की जाने की व्यवस्था में इसे शामिल नहीं किया जाए और आगामी कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो रोक लगाई थी, उसे हटाया जाए।
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