मध्य प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. सनातन धर्म में नर्मदा नदी को मां गंगा के समान माना जाता है. इसका उद्गम मध्य प्रदेश के अमरकंटक से हुआ है. नर्मदा जयंती के अवसर पर हर साल अमरकंटक से लेकर ओंकारेश्वर, महेश्वर तक संस्कृती विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण आयोजन किए जाते रहे हैं. ज्योतिष आचार्य पंडित अमर डब्बावाला के मुताबिक सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि नर्मदा नदी में स्नान करने से सभी प्रकार के पाप क्षय होते हैं.
भारी लोडिंग वाहन किए गए हैं प्रतिबंधित
इसके अलावा नर्मदा में दीपदान का भी काफी महत्व है. नर्मदा जयंती के अवसर पर कई प्रकार के आयोजन किए जाते हैं. इसी के चलते इंदौर-खंडवा हाईवे मार्ग पर भारी लोडिंग वाहन 4 फरवरी को दिन के समय प्रतिबंधित किए गए हैं. इसके अलावा यातायात परिवर्तित किया गया है.
नर्मदा जयंती का अवसर पर आयोजन
नर्मदा जयंती के अवसर पर दोपहर 12:00 बजे नर्मदा के घाटों पर सैकड़ों लीटर दूध से अभिषेक कर की जाएगा और नर्मदा का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. इसके अलावा खेड़ी घाट और ओंकारेश्वर में हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी. इतना ही नहीं मां नर्मदा को जगह-जगह चुनरी चढ़ाकर, प्रसाद का वितरण किया जाएगा. इसके अलावा भंडारे भी किए जाएंगे. मां नर्मदा जयंती को लेकर विभिन्न प्रकार के संगठन संस्थाओं द्वारा शोभायात्रा, आतिशबाजी और दीपदान का आयोजन भी रखा गया है.
नर्मदा जयंती के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा की परिक्रमा कर चुनरी भी चढ़ाते हैं.
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