आज नर्मदा जयंती है। हम सब अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, जो परम पावनी मां नर्मदा का प्रत्यक्ष दर्शन कर रहे हैं। भगवती नर्मदा के लिए पुराणों में एक शब्द आया है, वो है ‘नर्मदा सरितां वरा’-अर्थात् सरिताओं में नर्मदा सर्वश्रेष्ठ हैं। माता नर्मदा असंख्य विशेषताओं से सम्पन्न हैं। भारत मेंबहुत सी पवित्र नदियां हैं, लेकिन पुराण तो केवल नर्मदा जी के नाम पर ही (नर्मदा पुराण) है। जिसमें माता नर्मदा के परम पावन चरित्र का वर्णन है।
यहां एक और बात उल्लेखनीय है कि भारत में किसी भी नदी की परिक्रमा नहीं होती, केवल नर्मदा की ही परिक्रमा होती है। वे लोग सौभाग्यशाली हैं, जिन्होंने नियम पूर्वक मां नर्मदा की परिक्रमा की है। पुराणों में इस बात को लिखा गया है कि सरस्वती तीन दिन में, यमुना एक सप्ताह में, गंगा तत्काल पवित्र करती हैं, लेकिन मां नर्मदा तो दर्शन मात्र से मानव जीवन को पवित्र कर देती हैं। लेकिन विडंबना यह है कि तमाम विशेषताओं के बाद भी आज मां नर्मदा के अविरल धारा को अशुद्ध करने के बजाए मानव जीवन में इसकी शुद्धता को बनाए रखने का संकल्प लेने की बड़ी आवश्यकता है। ऐसे में आज मां नर्मदा जयंती पर हम संकल्प लें कि नदी को नहर न बनने देंगे।
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