चुनाव विधानसभा का हो या लोकसभा का, मध्य प्रदेश का नाम आते ही आदिवासी और एससी मतदाताओं की इसमें अहम भूमिका रहती है। सभी राजनीतिक दलों का फोकस इस वर्ग को अपने पाले में करने का ही रहता है। यही कारण है कि भाजपा चुनाव के चरम पर अब अपना एक और दांव आजमाने जा रही है। दरअसल, प्रदेश की 82 विधानसभा सीटों पर जीत का दारोदमदार इस वर्ग के मतदाताओं पर है। दूसरी तरफ प्रदेश की सभी 29 सीटों पर आरक्षित वर्ग के मतदाताओं का मतदान भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
ऐसे में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य मतदाताओं के बीच मतदान के चारों चरणों के अंतिम तीन दिनों में भाजपा विधायक, सांसद, पदाधिकारियों को सीधा संवाद करेंगे। लक्ष्य रखा गया है कि इन वर्गों के हर घर तक बीजेपी कार्यकर्ता के जरिये ही सही पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है। इसके तहत मोहल्लों से लेकर बूथ और छोटी स्थानीय सभाओं से लेकर स्टार प्रचारकों की सभाएं भी होंगी।
आखिरी तीन दिनों में हर घर पहुंचेंगे, विधायक, सांसद समेत पदाधिकारी। आदिवासी वर्ग की योजनाओं पर चर्चा करेंगे।