छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा क्षेत्र की पहाड़ियां इन दिनों सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण जंग का मैदान बनी हुई हैं। खुफिया इनपुट के आधार पर इस इलाके में बड़ी संख्या में माओवादी हिंसकों की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने रणनीतिक तरीके से पहाड़ियों की घेराबंदी करते हुए बड़ा अभियान शुरू किया। इलाके का दहला देने वाला सन्नाटा अब चौबीसों घंटे चल रही कांबिंग और सर्च कार्रवाई से टूट रहा है।
खुफिया रिपोर्ट में माओवादी कमांडरों की मौजूदगी
खुफिया एजेंसियों द्वारा जुटाई गई जानकारी ने अभियान की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इन रिपोर्टों के अनुसार कर्रेगुट्टा इलाके में सौ से अधिक माओवादी सक्रिय हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख नामों में केशा और पापाराव जैसे वांछित उग्रवादी शामिल हैं। इस तरह के खतरनाक नामों की उपस्थिति ने सुरक्षा बलों को और अधिक सतर्क बना दिया है, जिसके चलते किसी भी दिशा से भागने की संभावना को रोकने के लिए पहाड़ियों को चारों ओर से घेर लिया गया है।
नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों का ध्वस्तीकरण
अभियान के पहले चरण में सुरक्षा एजेंसियों ने कर्रेगुट्टा की गुफाओं, खाइयों और जंगल के भीतर बने माओवादियों के कई सुरक्षित ठिकानों को ढूंढकर नष्ट किया। वर्षों से छिपने और हमले की योजना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे इन ठिकानों में भारी मात्रा में सामग्री, दैनिक उपयोग के सामान और ट्रैपिंग व्यवस्था मिली। इन ठिकानों का ध्वस्तीकरण सुरक्षा बलों के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि यह माओवादियों की उस संरचना को तोड़ता है जिस पर वे लंबे समय से निर्भर थे।
दो हजार जवानों की ऐतिहासिक तैनाती
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता है सुरक्षा बलों की अभूतपूर्व संख्या। लगभग दो हजार जवानों की बहुस्तरीय तैनाती की गई है, जिनमें विशेष बल, जिला रिज़र्व गार्ड, सीआरपीएफ की इकाइयाँ और राज्य पुलिस बल शामिल हैं। यह तैनाती दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां इस अभियान को निर्णायक मोड़ देने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी हैं। पहाड़ियों, जंगल पथों और नदी किनारे के इलाकों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि माओवादी किसी भी तरह की पलायन कोशिश न कर सकें।
सीमा क्षेत्र में नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार की रणनीति
तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रही है। दोनों राज्यों की संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य इस इलाके में संचालित माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है। रणनीति का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभियान के दौरान किसी भी संभावित मुठभेड़, घात हमले या बारूदी सुरंग के खतरे से निपटने के लिए उन्नत तकनीक और आधुनिक हथियारों का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह अभियान सफल रहा, तो सीमा क्षेत्र में माओवादी प्रभाव पर निर्णायक प्रहार होगा।
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