ओबीसी आरक्षण को लेकर पहले से ही बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस और बीजेपी में 27 फ़ीसदी आरक्षण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के दौर जारी है। ऐसे में 14 फ़ीसदी आरक्षण पर किन्नरों को शामिल कर दिया गया है, यह पहला ऐसा आरक्षण है जिसमें आरक्षण का लाभ लेने वाला भी खुश नहीं है, और ओबीसी वर्ग भी अपने हितों पर डांका का आरोप लगा रहे हैं (MP News)।
क्या किन्नरों की मांग पर होगा बोर्ड का गठन? (MP News)
ओबीसी को लेकर सभी राजनैतिक दल ओबीसी हित की बात करते रहे है। मध्यप्रदेश में आधे से ज्यादा आबादी ओबीसी वर्ग की है। चुनावी साल में प्रदेश सरकार किन्नर समुदाय के लोगों को आरक्षण का लाभ देने वाला देश भर में पहला राज्य बन गया है। लेकिन किन्नर समुदाय अपने आप को किसी भी वर्ग में शामिल होने पर अपनी नाराजगी जता रही है। बीते दिन किन्नर समुदाय की गुरु सुरैया ने कहा कि, उन्हें ओबीसी वर्ग से हटाया जाए। सरकार ने बिना हमसे बात किए इस वर्ग में शामिल किया है। सरकार को चाहिए था कि किन्नर बोर्ड की स्थापना करें, हमें दूसरे प्रदेशों की जैसे राज्यमंत्री का दर्जा दे।
कैबिनेट बैठक में लिया गया था फैसला
11 अप्रैल को शिवराज कैबिनेट की बैठक में किन्नर समाज को ओबीसी वर्ग में शामिल करने को लेकर मुहर लगाई गई थी। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कैबिनेट में पारित प्रस्तावों के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि, हमनें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए ट्रांसजेंडर समाज को पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया है। अभी तक 93 जातिया ओबीसी वर्ग में आती थी। पिछड़ा वर्ग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भगत सिंह कुशवाहा ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया था।
पिछड़ा वर्ग भी आया विरोध में
किन्नर समुदाय को ओबीसी वर्ग में जोड़ने पर पिछड़ा वर्ग भी इसके विरोध में आ गया है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और ओबीसी महासभा ने भी इसको लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। कमलेश्वर पटेल ने जहां इस फैसले को OBC वर्ग के साथ छलावा बताया तो वहीं ओबीसी महासभा ने प्रदेश सरकार को पिछड़ा वर्ग का विरोधी बताया। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा आबादी 52% ओबीसी वर्ग ह। देश में सबसे कम 14% उन्हें मध्यप्रदेश में आरक्षण मिलता है, 30,000 से ज्यादा ट्रांसजेंडर को को आरक्षण देकर हमारा हक मारने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने सरकार से आरक्षण वापस लेने की मांग भी की है। आरक्षण वापस नहीं होने पर राजस्थान में गुर्जर समाज के जैसे उग्र आंदोलन तक करने की चेतावनी भी दी है।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए निर्णय का पालन कर पाती है। या किन्नर ,ओबीसी और कांग्रेस के विरोध के चलते सरकार अपने फैसले को बदलती है।
Written By: Pradeep Talreja
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