एमपी में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा फिर जोर पकड़ने लगा है(OBC RESERVATION) आगामी विधानसभा चुनाव में ओबीसी आरक्षण का मामला बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। यह मामला अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है। वजह यह है कि कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी की थी, लेकिन तब से ही यह मामला हाई कोर्ट में चला गया। इसका प्रभाव यह हुआ कि 14 प्रतिशत या फिर 27 प्रतिशत के फेर में सारी सरकारी भर्ती प्रक्रियाएं रुकी हुई हैं।हर भर्ती का मामला(OBC RESERVATION) इसी मसले पर कोर्ट पहुंच जाता है और उस पर स्थगन आदेश आ जाता है। कांग्रेस भाजपा सरकार पर आरोप लगाती है कि उसने कोर्ट में सरकार का पक्ष ठीक से नहीं रखा, इसलिए निर्णय नहीं हो पाया। इस चक्कर में भाजपा, कांग्रेस दोनों एक दूसरे को ओबीसी विरोधी ठहरा रही हैं।
आंकड़ों पर नजर डाले तो विधानसभा की 230 सीटों में से 60 ओबीसी वर्ग के पास है। साल 2020 के उपचुनाव के बाद इनमें से 32 सीटों पर भाजपा और 28 सीटों पर कांग्रेस के विधायक काबिज हैं। प्रशासनिक क्षेत्र में प्रथम से चतुर्थ वर्ग के 85 हजार 362 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। गौरतलब है कि दिग्विजय सरकार में ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, जिसे साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया। वर्तमान में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में 27 प्रतिशत मानक माना जा रहा है। यही वजह है जिस कारण किसी भी विभाग में भर्ती नहीं हो पा रही है, इससे अन्य वर्ग में नाराजगी बढ़ रही है।
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