हरदा की बैरागढ़ पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के 17 दिन बीत चुके हैं, लेकिन जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में समिति गठित की थी और त्वरित फैसला करते हुए शासन की ओर से कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक हटा दिए गए थे। जांच रिपोर्ट नहीं आने से अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अब तक कोई कार्रवाई न हुई, न तय की जा सकी। इसमें तत्कालीन संभागायुक्त और अपर कलेक्टर की भूमिका का निर्धारण भी होना है। ऐसे ही 7 बड़े मामलों की छानबीन अटकी।
पेंशन घोटाला भी शामिल
पटाखा फैक्ट्री में छह फरवरी को हुए विस्फोट में कुल 13 लोगों की मौत हुई थी। फैक्ट्री में मौजूद मजदूरों की मानें तो विस्फोट के पीछे एक छोटी सी चिंगारी थी, जो वहां बारूद को बारीक करने के दौरान निकली थी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पेटलावद हादसा सहित अलग-अलग घटनाओं, जिनमें पेंशन घोटाला भी शामिल है, की जांच के लिए सात जांच आयोग बनाए गए, जिनकी रिपोर्ट न तो विधानसभा में प्रस्तुत की गई है और न ही इस पर कोई चर्चा की गई। विपक्ष द्वारा सदन में कई बार सवाल किए गए, लेकिन सरकार हमेशा बचती रही है।
पेटलावद में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट
2015 में झाबुआ के पेटलावद में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट की जांच के लिए जबलपुर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर्येंद्र कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया गया था। सक्सेना द्वारा तीन माह में जांच पूरी कर प्रतिवेदन 11 दिसंबर 2015 को मुख्य सचिव को सौंप दिया गया था। यह रिपोर्ट छह अप्रैल 2016 को गृह विभाग को भेजी गई। तब से अब तक कार्यवाही प्रचलन में है। पेटलावद में 79 लोगों की मौत हुई थी, 150 से अधिक लोग घायल हुए थे।
बालाघाट और दमोह में भी पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट
बालाघाट और दमोह में भी पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो चुके हैं। बालाघाट जिला मुख्यालय से सात किमी दूर ग्राम खैरी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में सात जून 2017 को तेज धमाका हुआ था। इसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 2015 में किरनापुर तहसील में अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका हुआ था। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी, एक दर्जन लोग घायल हुए थे। दमोह में भी अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाके से सात लोगों की जान जा चुकी है।
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