Bhopal: जिला अभिभाषक संघ भोपाल (Lawyers Strike in Bhopal) की हड़ताल ने बड़ा रूप ले लिया है। हड़ताल के दौरान गुरुवार को अधिवक्ताओं ने जिला न्यायालय मे सातों प्रवेश द्वार पर एकत्र होकर पक्षकारों को अंदर जाने से रोक दिया। हड़ताल के दौरान 25 मार्च को होने वाली प्रदेशस्तरीय बैठक में 35 जिलों की 125 तहसीलों के संघ प्रतिनिधियों ने शामिल होंगे। अभिभाषक संघ जिस तरह तैयारियों में जुटा है उसके चलते इस बैठक के लिए जिलों और तहसीलों की संख्या और बढ़ सकती है। भोपाल में अधिवक्ताओं की हड़ताल को एक माह पूरा होने जा चुका है वकीलों ने 25 मार्च तक हड़ताल पर रहने की घोषणा की है। 25 मार्च को प्रदेश स्तरीय आयोजन की तैयारी है।
पक्षकारों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना
हड़ताल के कारण पक्षकारों (Lawyers Strike in Bhopal) को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई फरियादी एवं साक्षी दूरदराज के इलाकों से केस की सुनवाई के लिए कोर्ट पहुंचे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो सकी। इस वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा। कार्य बहिष्कार के दौरान कोर्ट का नजारा कुछ अलग ही है, अधिवक्ता अपने टेबल पर बैठे तो दिखते है, लेकिन न्यायिक कार्यों से खुद को अलग रखते हैं। इस तरह से उन्होंने बार काउंसिल के साथ खड़े होकर अपना विरोध जताया। जहां बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकजुट होकर उक्त हड़ताल को सफल बनाने में जुटे हैं वहीं कुछ अधिवक्ताओं में मतभेद भी नजर आ रहे है। अधिवक्ताओं में कुछ समर्थक है तो कुछ हड़ताल विरोधी है।
इसलिए की जा रही हड़ताल
उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा प्रदेश के सभी न्यायालयों को 25- 25 पुराने प्रकरणों को तीन माह में अनिवार्य समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके विरोध में वकीलों द्वारा हड़ताल की गई है। हड़ताल के दौरान जिला अभिभाषक संघ भोपाल की कार्यकारिणी द्वारा गुरुवार को अपनी मांगों की चर्चा की गई। इसमें मुख्य रूप से 25-25 पुराने मुकदमों के अलावा अन्य सभी मुकदमों की सुनवाई नियमित रूप से होने और उनकी तिथि भी अधिक लंबी न होने की बात रखी गई और पुराने प्रकरणों की समयावधि जो तीन माह रखी गई थी वो समाप्त होना चाहिए। साथ ही पुराने प्रकरणों की सुनवाई केवल शुक्रवार एवं शनिवार को की जाने की मांग की गई।
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