मध्यप्रदेश के कटनी जिले में खनिज संपदा को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक खोज सामने आई है। बड़वारा जनपद की ग्राम पंचायत लोहरवारा के सलैया केवट क्षेत्र में उमड़ार नदी के किनारे उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की मोटी सीम उजागर हुई है। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले इसी जिले में सोने और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स के संकेत मिल चुके हैं।
रेत खनन के दौरान हुआ बड़ा खुलासा
उमड़ार नदी से सटी रेत खदान में खनन कार्य के दौरान अचानक काले रंग का पत्थरनुमा पदार्थ निकलने लगा। प्रारंभिक जांच में यह उच्च गुणवत्ता का कोयला प्रतीत हुआ। खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और बोरियों, साइकिलों तथा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में कोयला भरकर ले जाने लगे। स्थिति अवैध उत्खनन जैसी बनने लगी, जिससे प्रशासन और खनिज विभाग को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रशासन अलर्ट, GSI और खनिज विभाग का संयुक्त सर्वे
घटना की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और खनिज विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम ने करीब ढाई घंटे तक स्थल का निरीक्षण किया और कोयले की सीम, उसकी मोटाई और गुणवत्ता का प्रारंभिक आकलन किया। सर्वे के दौरान पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कर अवैध उत्खनन पर रोक लगाई गई।
ए-ग्रेड बिटूमिनस थर्मल कोयले के संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, यहां मिला कोयला ए-ग्रेड बिटूमिनस थर्मल कोल हो सकता है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन और औद्योगिक इकाइयों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। नदी के कटाव के कारण कोयले की सीम सतह पर एक्सपोज्ड हुई है, जिसकी मोटाई आधा मीटर से लेकर डेढ़ से दो फीट तक स्पष्ट रूप से देखी गई है। यह संकेत क्षेत्र में बड़े भंडार की ओर इशारा करता है।
उमरिया सीमा से जुड़ा भूगर्भीय महत्व
कटनी का यह क्षेत्र उमरिया जिले के बरही इलाके से सटा हुआ है, जहां पहले से कोयले की मौजूदगी मानी जाती रही है। भूगर्भीय संरचना के लिहाज से यहां कोयले की संभावना पहले ही जताई जाती रही थी। अब विस्तृत ड्रिलिंग कर यह जांच की जाएगी कि कोयले की गहराई, सीम की संख्या और क्षेत्रफल कितना है और यहां इकोनॉमिकल माइनिंग संभव हो पाएगी या नहीं।
माइनिंग कॉन्क्लेव के बाद बड़ी सफलता के संकेत
गौरतलब है कि करीब पांच महीने पहले आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में 56,400 करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए गए थे। कटनी जिले में पहले सोना और क्रिटिकल मिनरल्स के संकेत मिलना और अब लिग्नाइट व थर्मल कोल के भंडार का सामने आना, इस कॉन्क्लेव के बाद खनिज क्षेत्र में बड़ी सफलता के संकेत माने जा रहे हैं।
रोजगार, राजस्व और औद्योगिक विकास की संभावनाए
यदि सर्वे रिपोर्ट पूरी तरह सकारात्मक रहती है और इस क्षेत्र में कोयला खदानों का विकास होता है, तो कटनी ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की पूरी संभावना है।
MP की खनिज ताकत का नया संकेत
कटनी में मिला यह ‘काला सोना’ केवल एक खोज नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता और औद्योगिक भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सर्वे और परीक्षण के नतीजे यह तय करेंगे कि यह खोज राज्य के विकास की कहानी को कितनी ऊंचाई तक ले जाती है।
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