नई दिल्ली. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता, विशेषकर किसानों के नाम एक भावुक और महत्वपूर्ण संबोधन दिया। प्रधानमंत्री की शैली में किए गए इस संवाद में उन्होंने किसानों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए स्पष्ट किया कि सरकार की हर नीति और योजना अन्नदाताओं की समृद्धि और आय वृद्धि को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा का मूल आधार किसान ही हैं।
‘किसान कल्याण वर्ष’ का किया ऐलान
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प लेते हुए किसानों के लिए नई योजनाओं और सुविधाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाना है। इसके लिए कृषि के साथ-साथ पशुपालन और अन्य सहायक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
गेहूं खरीदी में रिकॉर्ड और बढ़ी सुविधाए
प्रदेश में इस वर्ष रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन को देखते हुए सरकार ने केंद्र से खरीदी का कोटा 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करने का आग्रह किया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही किसानों की सुविधा के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है और जरूरत पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाया जा सकता है। मंडियों में सप्ताह में छह दिन खरीदी होगी और शनिवार को भी अवकाश नहीं रहेगा, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी।
समर्थन मूल्य और मुआवजा नीति में राहत
मुख्यमंत्री ने सरसों की फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से अधिक कीमत मिलने का उल्लेख करते हुए किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की बात कही। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण के मामलों में चार गुना मुआवजा देने की घोषणा भी की गई है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सके।
बिजली और सिंचाई में बड़ा बदलाव
किसानों को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सिंचाई के लिए बिजली रात के बजाय दिन में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे खेती का कार्य अधिक सुविधाजनक हो सकेगा। इसके साथ ही किसानों को मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना भी लागू की जा रही है। सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देकर सरकार किसानों को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
पशुपालन को उद्योग बनाने की दिशा में पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी उद्योग के रूप में विकसित किया जा रहा है। 1552 नई समितियों के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है और अब तक किसानों को 1600 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
‘मिल्क कैपिटल’ बनने की ओर प्रदेश
प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि दुग्ध उत्पादकों को बेहतर कीमत दिलाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यापक योजनाएं बनाई जा रही हैं। भविष्य में दूध संग्रह और वितरण की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
समृद्ध किसान, सशक्त प्रदेश का लक्ष्य
मुख्यमंत्री के इस संबोधन से यह स्पष्ट संदेश मिला कि सरकार किसानों की समृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। कृषि, पशुपालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे सुधार प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह पहल न केवल किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी, बल्कि पूरे प्रदेश के विकास को नई गति प्रदान करेगी।