मध्य प्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2025-26 के अंतर्गत 20 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक शीतकालीन सर्वे किया जाएगा। यह गणना सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वन वृत्तों और 9 टाइगर रिजर्व में आयोजित की जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, डब्ल्यूआईआई के प्रतिनिधि, स्वयंसेवक और फोटोग्राफर भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
अब तक के प्रमुख आंकड़े
- प्रदेश में गिद्ध गणना की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी, जिसमें 7,028 गिद्ध दर्ज किए गए थे।
- वर्ष 2025 की शीतकालीन गणना में 12,710 गिद्ध पाए गए।
- वर्ष 2025 की ग्रीष्मकालीन गणना में 9,509 गिद्धों का आंकड़ा सामने आया।
7 प्रजातियों की निगरानी
मध्यप्रदेश में कुल 7 प्रजातियों के गिद्ध पाए जाते हैं, जिनमें 4 स्थानीय और 3 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। प्रवासी गिद्ध सर्दी समाप्त होते ही वापस लौट जाते हैं। शीत ऋतु के अंतिम चरण में गणना इसलिए की जाती है क्योंकि इस समय घोंसलों में अंडों से बच्चे निकल चुके होते हैं या निकलने की अवस्था में होते हैं, जिससे सटीक आंकलन संभव हो पाता है।
पहली बार डिजिटल ऐप का उपयोग
इस वर्ष गिद्ध गणना के लिए पहली बार ऑनलाइन ऐप तैयार किया गया है। ऐप के जरिए डेटा संकलन और रिपोर्ट तैयार करना अधिक आसान और पारदर्शी होगा। गणनाकर्मियों, मास्टर ट्रेनर्स और संबंधित संस्थाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया है। पूर्व वर्षों में यह प्रक्रिया ऑफलाइन पद्धति से की जाती थी।
गणना की प्रक्रिया
गणनाकर्मी सूर्योदय के तुरंत बाद चयनित घोंसलों के पास पहुंचकर घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों और उनके शावकों की गणना करेंगे। केवल विश्राम स्थलों पर मौजूद गिद्धों को ही गिना जाएगा, जबकि उड़ते हुए गिद्धों को शामिल नहीं किया जाएगा। गणना के बाद एकत्रित आंकड़ों का संकलन Van Vihar National Park में किया जाएगा। यह अभियान प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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