मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर, बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और सैकड़ों वर्षों से शिवभक्तों की आस्था का केंद्र रहा है। यहाँ नर्मदा की शांत धारा और पहाड़ी पर बसा ओंकार पर्वत मिलकर एक दिव्य वातावरण बनाते हैं। अद्वैत दर्शन के प्रवर्तक आदि शंकराचार्य का यहाँ से गहरा संबंध होने के कारण यह स्थान आध्यात्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या है ‘अद्वैत वन’—एक जीवंत आध्यात्मिक परिसर
अद्वैत वन एक विशाल आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ ध्यान केंद्र, अध्ययन स्थल, सांस्कृतिक मंच और प्राकृतिक पथ शामिल होंगे। इसका उद्देश्य अद्वैत वेदांत के सिद्धांत—एकत्व और सार्वभौमिक चेतना—को अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शांति, चिंतन और आत्मिक सुकून का वातावरण मिलेगा।
टूरिज्म और वेलनेस—दोनों का नया केंद्र
यह प्रोजेक्ट MP के धार्मिक और वेलनेस टूरिज्म को नया आयाम देने वाला है। ओंकारेश्वर पहले से ही तीर्थयात्रियों के लिए प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अद्वैत वन के विकसित होने से यह स्थल ध्यान-योग, आध्यात्मिक रिट्रीट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का वैश्विक केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय रोजगार, होटल, गाइड सेवाएँ और कारीगरों को नया अवसर मिलेगा।
पर्यावरण और नर्मदा संरक्षण पर विशेष फोकस
परियोजना का एक अहम पक्ष प्राकृतिक संतुलन और नर्मदा संरक्षण है। यहाँ पौधारोपण, इको-फ्रेंडली निर्माण और नदी तट के संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। उद्देश्य यह है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ आगे बढ़ें और क्षेत्र की मूल पारिस्थितिकी को कोई नुकसान न पहुँचे।
ज्ञान, संस्कृति और दर्शन का अंतरराष्ट्रीय मंच
अद्वैत वन में आध्यात्मिक अध्ययन, स्क्रिप्ट लाइब्रेरी, सेमिनार और सांस्कृतिक संवाद की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे यह स्थान केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र बन सकता है, जहाँ देश–दुनिया से विद्वान और साधक एकत्र हो सकेंगे
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