दुनिया के सबसे बड़े उष्णकटिबंधीय वर्षावन अमेज़न को लंबे समय से पृथ्वी के ‘फेफड़े’ कहा जाता है, क्योंकि यह वैश्विक कार्बन संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने संकेत दिया है कि यदि वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर की तुलना में 1.5 से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है और वनों की कटाई का दायरा भी बढ़ता है, तो अमेज़न का विशाल क्षेत्र गंभीर पारिस्थितिक परिवर्तन का सामना कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति केवल स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक जलवायु प्रणाली को प्रभावित कर सकती है।
वर्षावन से सवाना में बदल सकता है विशाल क्षेत्र
अध्ययन के अनुसार अमेज़न का लगभग दो-तिहाई हिस्सा धीरे-धीरे घने वर्षावन की जगह कम घनत्व वाले जंगलों अथवा सवाना जैसी पारिस्थितिक व्यवस्था में परिवर्तित हो सकता है। सवाना ऐसे घासयुक्त क्षेत्र होते हैं जहां पेड़ों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह परिवर्तन अचानक नहीं होगा, लेकिन एक निश्चित सीमा पार होने के बाद इसकी प्रक्रिया को रोकना अत्यंत कठिन हो जाएगा। यही कारण है कि इसे ‘टिपिंग पॉइंट’ या निर्णायक मोड़ कहा जा रहा है।
वनों की कटाई ने बढ़ाई संवेदनशीलता
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि अमेज़न की सबसे बड़ी चुनौती केवल तापमान वृद्धि नहीं, बल्कि लगातार हो रही वनों की कटाई भी है। जंगलों के नष्ट होने से वातावरण में नमी कम होती है और वर्षा चक्र कमजोर पड़ जाता है। अमेज़न की विशेषता यह रही है कि यह स्वयं अपने लिए वर्षा उत्पन्न करने वाली प्राकृतिक प्रणाली विकसित करता है, लेकिन जब बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है तो यह तंत्र प्रभावित होने लगता है। परिणामस्वरूप सूखे की घटनाएं बढ़ती हैं और जंगल की पुनर्जीवन क्षमता घटने लगती है।
दूर-दराज क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है असर
वैज्ञानिकों का कहना है कि अमेज़न केवल दक्षिण अमेरिका का वन क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसी एक क्षेत्र में वनों की कटाई बढ़ती है, तो उसका प्रभाव सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर स्थित क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। वातावरण में नमी के प्रवाह में व्यवधान आने से वर्षा के पैटर्न बदल सकते हैं और व्यापक स्तर पर सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस प्रकार अमेज़न में होने वाले परिवर्तन दुनिया के कई देशों की कृषि, जल संसाधनों और मौसम प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
पहले ही खो चुका है बड़ा वन क्षेत्र
अध्ययन में यह भी बताया गया है कि अमेज़न का लगभग 17 से 18 प्रतिशत वन क्षेत्र पहले ही नष्ट हो चुका है। यह आंकड़ा वैज्ञानिकों को इसलिए चिंतित कर रहा है क्योंकि इससे पारिस्थितिकी तंत्र उस संवेदनशील सीमा के और करीब पहुंच गया है जहां से वापसी कठिन हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संरक्षण उपायों को और मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए वनों की कटाई रोकने और पुनर्वनीकरण कार्यक्रमों को गति देने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए चेतावनी
यह अध्ययन ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया के अनेक देश जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उत्सर्जन घटाने और वन संरक्षण के लक्ष्य तय कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेज़न का संरक्षण केवल ब्राज़ील या दक्षिण अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा आवश्यकता है। यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया और वन संरक्षण प्रयास कमजोर पड़े, तो अमेज़न में होने वाले बदलाव पृथ्वी की जलवायु स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। यही कारण है कि इस शोध को भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है।