ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका तनाव कम करने के बजाय अपनी सैन्य कार्रवाई के जरिए पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप स्थित तटीय रडार एवं निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया है, जो सीजफायर समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है।
ईरान ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ईरान ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद क्षेत्र में जो भी हालात पैदा होंगे और उसके जो भी परिणाम सामने आएंगे, उनकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी।
तेहरान का आरोप है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर रही हैं और संघर्ष को और बढ़ा सकती हैं।
लेबनान में बढ़ता जा रहा मौतों का आंकड़ा
इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष में भी हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार 2 मार्च से शुरू हुए इजराइली हमलों में अब तक 3,593 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,990 से अधिक लोग घायल हुए हैं।पिछले 24 घंटों के दौरान 35 लोगों की जान गई और करीब 120 लोग घायल हुए हैं।
दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले तेज
शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों में लेबनानी सेना के एक ब्रिगेडियर जनरल समेत 10 लोगों की मौत हो गई।हमलों के बाद कई संवेदनशील इलाकों में लोगों को घर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका ने चार ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया
अमेरिका ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र की ओर बढ़ रहे ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया है। इसके अलावा अमेरिकी सेना ने केश्म द्वीप स्थित रडार ठिकानों पर कार्रवाई करने की भी बात कही है।
अमेरिकी दावों के बीच ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिन्हें इंटरसेप्ट किए जाने का दावा किया गया है।
क्षेत्र में बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप तथा मध्य पूर्व में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब दोनों देशों की अगली रणनीति और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई हैं।