यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका अब कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी आक्रामक रुख अपना रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की तैयारी का समर्थन करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि वॉशिंगटन अब परोक्ष रूप से रूस की मदद करने वाले देशों को भी जवाबदेह ठहराना चाहता है। इस कदम को रूस पर दबाव बढ़ाने की नई रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
500 प्रतिशत टैरिफ के समर्थन में ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने उस विधेयक के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया है, जिसके तहत रूसी तेल की खरीद या पुनर्विक्रय करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिका का मानना है कि सस्ते रूसी तेल की खरीद से रूस को युद्ध जारी रखने के लिए आर्थिक ताकत मिल रही है, जिसे हर हाल में कमजोर करना जरूरी है।
भारत, चीन और ब्राजील पर बढ़ेगा दबाव
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अनुसार यह द्विदलीय विधेयक राष्ट्रपति को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ कठोर आर्थिक कार्रवाई का अधिकार देगा। ग्राहम ने कहा कि ये देश रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं और ऐसे में इन पर दबाव बनाकर रूस की ‘वॉर मशीन’ को आर्थिक रूप से पंगु किया जा सकता है।
‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट, 2025’ क्या है
प्रस्तावित कानून ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट, 2025’ के तहत रूस से तेल की द्वितीयक खरीद और उसके पुनर्विक्रय पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकेगा। इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के अधिकांश सदस्यों का समर्थन हासिल है और अगले सप्ताह इस पर मतदान होने की संभावना जताई जा रही है।
भारत की तेल नीति पर असर का दावा
सीनेटर ग्राहम ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद में कुछ हद तक कमी की है। उनके अनुसार यह दिखाता है कि टैरिफ का दबाव असरदार है और भारत जैसे देश अब अपनी ऊर्जा रणनीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर हो रहे हैं।
वैश्विक राजनीति में बढ़ेगा तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है, तो इससे वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। खासकर भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण होगी, जिन्हें एक ओर ऊर्जा सुरक्षा और दूसरी ओर रणनीतिक साझेदारियों के बीच संतुलन साधना पड़ेगा।
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