वर्किंग लाइफ की व्यस्तता, तनाव और दिनभर की थकान के कारण कई माता-पिता अपने बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, जितना वे देना चाहते हैं। इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर दिखाई देने लगता है। बच्चे तभी आत्मविश्वासी, स्थिर और मजबूत बन पाते हैं, जब माता-पिता उन्हें समय, समझ और नैतिक समर्थन प्रदान करते हैं। ऐसे में पॉजिटिव पेरेंटिंग वह तरीका है जो बच्चों को संतुलित, समझदार और आत्मनिर्भर बनाना शुरू कर देता है।
पॉजिटिव पेरेंटिंग क्या है
पॉजिटिव पेरेंटिंग वह दृष्टिकोण है जिसमें माता-पिता बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझते हुए उनके मन में उठने वाले नकारात्मक विचारों का मूल्यांकन करते हैं और उन्हें सही दिशा प्रदान करते हैं। इसमें संवाद, धैर्य, प्रेम, अनुशासन और सहयोग का संतुलन होता है। इस प्रक्रिया से बच्चे न केवल माता-पिता के करीब महसूस करते हैं, बल्कि स्वयं के व्यक्तित्व को भी मजबूत बनाते हैं।
संवाद को प्राथमिकता देना
बच्चों को समझने का पहला तरीका है उन्हें ध्यान से सुनना। जब माता-पिता बच्चों को बोलने का अवसर देते हैं, उनकी बातों को महत्व देते हैं और उनके नजरिए को समझते हैं, तब बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। यह संवाद उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि वे महत्वपूर्ण हैं और उनकी भावनाओं को समझा जाता है। इससे उनके व्यक्तित्व में सहजता और सुरक्षा की भावना जन्म लेती है।
शांत रहकर समझाना सीखें
बच्चों की गलती पर गुस्सा दिखाना कई बार आसान लगता है, लेकिन इसका प्रभाव बहुत नकारात्मक होता है। चिल्लाने या कठोर शब्दों की बजाय शांत स्वर में समझाना बच्चा जल्दी स्वीकार करता है। जब बच्चे को यह महसूस होता है कि उसकी गलती पर भी उसके माता-पिता उसे संभालने और दिशा देने के लिए मौजूद हैं, तब वह सीखने और सुधारने की मानसिकता विकसित करता है। यह रवैया आगे चलकर उसके व्यवहार को संतुलित बनाता है।
अच्छे व्यवहार की सराहना करें
बच्चे अपने सकारात्मक प्रयासों की सराहना से बेहद उत्साहित होते हैं। जब माता-पिता किसी भी अच्छे कार्य, अनुशासन या जिम्मेदारी निभाने पर तुरंत उनकी प्रशंसा करते हैं, तो बच्चे प्रेरित होते हैं। यह प्रेरणा उन्हें बेहतर करने और उचित व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। नियमित सराहना बच्चे के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती है।
घर का वातावरण सकारात्मक रखें
बच्चे वही सीखते हैं जो वे घर में देखते और महसूस करते हैं। यदि माता-पिता शांत, सम्मानजनक और सकारात्मक व्यवहार अपनाते हैं, तो बच्चा भी उसी व्यवहार को अपने जीवन का हिस्सा बना लेता है। इसके विपरीत, चिल्लाना, तनाव या हिंसक व्यवहार बच्चे के मन में भय और असुरक्षा पैदा करते हैं। एक सुरक्षित, प्रेमपूर्ण और शांत माहौल बच्चों की मानसिक सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण नींव बनता है।
बच्चों के साथ समय की गुणवत्ता बढ़ाए
वर्किंग पेरेंट्स के लिए समय सीमित होना स्वाभाविक है, लेकिन थोड़ा कम समय भी यदि पूरी गुणवत्ता के साथ दिया जाए तो बहुत प्रभावी साबित होता है। बच्चों के साथ खेलना, बातचीत करना, पढ़ाना या सिर्फ उनके साथ बैठना भी उनके मन को आश्वस्त करता है। यह समय उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है और माता-पिता के साथ उनका रिश्ता गहरा करता है।
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