टीनएजर्स में मीठे पेय पदार्थों का सेवन तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की दर भी ऊपर जा रही है। नई वैज्ञानिक खोज में यह सामने आया है कि जो किशोर रोजाना अधिक मात्रा में शुगर-स्वीटन्ड बेवरेजेस लेते हैं, उनमें एंग्जायटी का खतरा लगभग 34 प्रतिशत अधिक पाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर का अत्यधिक सेवन शरीर की हार्मोनल और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों को प्रभावित कर मानसिक बेचैनी और घबराहट को बढ़ाता है।
बोर्नमाउथ यूनिवर्सिटी की महत्वपूर्ण रिसर्च
यह शोध इंग्लैंड की Bournemouth University द्वारा किया गया और प्रतिष्ठित Journal of Human Nutrition में प्रकाशित हुआ। अध्ययन में हजारों किशोरों की भोजन आदतों और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि उच्च शुगर सेवन और एंग्जायटी स्कोर के बीच स्पष्ट संबंध मौजूद है, जो इसे बेहद गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर मीठे पेय पदार्थों का गहरा असर
अब तक अधिकतर लोग शुगरी ड्रिंक्स को मोटापा, डायबिटीज़ और दांतों की समस्याओं से जोड़ते रहे हैं। लेकिन यह शोध बताता है कि इन पेय पदार्थों का प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है। अत्यधिक शुगर से दिमाग में ऊर्जा का अस्थिर प्रवाह होता है, जिससे मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, घबराहट और पैनिक जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि टीनएजर्स में बढ़ती बेचैनी का एक महत्वपूर्ण कारण इन पेय पदार्थों का बढ़ता उपयोग माना जा रहा है।
हार्मोनल असंतुलन और नींद पर भी असर
शोधकर्ताओं के अनुसार, शुगरी ड्रिंक्स शरीर में इंसुलिन स्तर को असामान्य तरीके से बढ़ा देते हैं, जिसका सीधा प्रभाव तनाव हार्मोन पर पड़ता है। इसके साथ ही ऐसे पेय पदार्थ नींद की गुणवत्ता को भी खराब करते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएँ और अधिक गहरी हो सकती हैं। नींद की कमी, थकान और मानसिक तनाव मिलकर टीनएजर्स में एंग्जायटी को और बढ़ाते हैं।
क्या है समाधान?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि टीनएजर्स को मीठे पेय पदार्थों के स्थान पर पानी, नारियल पानी, प्राकृतिक फ्रूट जूस या घर के बने हेल्दी विकल्प अपनाने चाहिए। स्कूलों और परिवारों को भी संतुलित पोषण और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जागरूकता बढ़ानी चाहिए। यदि किशोर लगातार घबराहट या बेचैनी महसूस कर रहे हों, तो उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए और शुगर सेवन को नियंत्रित करना चाहिए।
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